Wednesday, July 15, 2026

भक्ति की शक्ति से संयम धारण कर मनुष्य जीवन को सार्थक बनाएँ : आचार्य वर्धमान सागर

धोद (सीकर)। शाबाश इंडिया।


वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (37 पिच्छिका) का मंगलवार को धोद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। 52 वर्ष बाद आचार्य श्री के आगमन से पूरा नगर धर्ममय वातावरण में रंग गया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ आचार्य संघ का स्वागत किया। शोभायात्रा में असम और मणिपुर के वाद्य एवं नृत्य दलों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। शोभायात्रा का समापन श्री चंद्रप्रभु जिनालय में हुआ।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि भक्ति की शक्ति से मनुष्य संयम धारण कर अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर स्वामी की पवित्र परंपरा में जन्म लेना हम सभी का सौभाग्य है। मंदिरों में उनकी पूजा-अर्चना का अवसर मिलना भी जीवन का परम पुण्य है।

आचार्य श्री ने कहा कि वे 52 वर्ष पूर्व धोद आए थे, तब यह गांव था और आज नगर बन चुका है। उन्होंने कहा कि गांव या नगर का बड़ा होना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि मन का बड़ा होना आवश्यक है। मन विशाल हो तो छोटा स्थान भी महान बन जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि और जन्मदात्री माता के प्रति सदैव प्रेम और सम्मान बनाए रखना चाहिए। व्यक्ति चाहे अपनी जन्मभूमि से दूर चला जाए, लेकिन उसे अपनी मिट्टी और संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए।

आचार्य श्री ने असम और मणिपुर के वाद्य एवं नृत्य दलों की सराहना करते हुए कहा कि कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने राजस्थान और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संदेश दिया है। यह भक्ति का ही प्रतिफल है, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों को एक सूत्र में जोड़ती है।

उन्होंने कहा कि श्रावक देव, शास्त्र और गुरु का भक्त होता है तथा सदैव संघ के सान्निध्य की भावना रखता है। इसी प्रकार साधु भी अपने दीक्षा गुरु एवं शिक्षा गुरु के प्रति भक्ति और वंदना का भाव रखते हैं। जयपुर से विहार के दौरान उन्होंने संकल्प लिया था कि शिक्षा गुरु एवं दीक्षा गुरु की समाधि स्थली के दर्शन अवश्य करेंगे।

डॉ. राजेश पंचोलिया एवं हितेश रारा मारोठ ने बताया कि आचार्य श्री के साथ 10 मुनिराज, 20 आर्यिका माताजी, एक ऐलक, चार क्षुल्लक एवं एक क्षुल्लिका सहित 37 पिच्छिका ससंघ का धोद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। समाज पदाधिकारियों ने बताया कि शोभायात्रा में असम एवं मणिपुर के कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

कार्यक्रम स्थल पर मुख्य जजमान कोलकाता के पाटनी परिवार द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इसके पश्चात मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का आयोजन हुआ। जिनवाणी भेंट का पुण्यार्जन भी श्रद्धालु परिवारों ने प्राप्त किया।

दोपहर में आचार्य श्री की पूजन एवं भक्ति नृत्य का आयोजन हुआ, जबकि शाम को श्रीजी एवं आचार्य श्री की आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर राजस्थान सहित विभिन्न नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

रिपोर्ट : आयुष पाटनी, भैंसलाना

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar