अशोकनगर। शाबाश इंडिया।

भारतीय जैन मिलन क्षेत्र-12 द्वारा जैन सम्राट गौरव वर्ष के अंतर्गत विशाल वर्चुअल रैली का आयोजन जूम एप के माध्यम से किया गया। रैली में क्षेत्र-12 के सैकड़ों सदस्यों ने सहभागिता कर राष्ट्रीय नेतृत्व के संदेशों को प्राप्त किया।
रैली के प्रभारी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष जैन कैंची ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट राष्ट्रीय संरक्षक विजय जैन, गुना द्वारा किया गया। उन्होंने रैली के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो व्यक्ति, संस्था या समाज अपने पूर्वजों के इतिहास से अनभिज्ञ रहता है, वह अपने धर्म और गौरवशाली परंपराओं के महत्व को पूर्ण रूप से नहीं समझ सकता। उन्होंने कहा कि अपने इतिहास को जानना, समझना और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से भारतीय जैन मिलन द्वारा इस वर्ष को जैन सम्राट गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज के सामाजिक, राजनीतिक एवं संगठनात्मक योगदान का भी परिचय कराया।
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य, पिछले 25 वर्षों से मेरठ जैन समाज के अध्यक्ष, प्रख्यात उपन्यासकार एवं भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश जैन रितुराज ने वर्चुअल रैली के माध्यम से जैन इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि समाज के अनेक लोग अपने नाम के साथ जैन शब्द का उपयोग नहीं करते, जिसके कारण समाज की पहचान और संख्या का सही आंकलन नहीं हो पाता। उन्होंने समाजजनों से अपनी पहचान और गौरवपूर्ण इतिहास के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जैन धर्म के अनादि इतिहास का उल्लेख करते हुए जैन शासकों के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य, अमोघवर्ष, महारानी अब्बक्का, बिंदुसार, महाराज सम्प्रति सहित अनेक जैन शासकों के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इन शासकों ने अहिंसा, शांति, नीति, न्याय, शिक्षा एवं संस्कृति आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया।
उन्होंने बताया कि अनेक जैन सम्राटों ने जीवन के अंतिम चरण में जैन मुनि दीक्षा ग्रहण कर संल्लेखना व्रत के माध्यम से देह त्याग किया। उन्होंने कहा कि भारत की उन्नति में जैन सम्राटों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और हमें अपने गौरवशाली इतिहास एवं प्राचीन संस्कृति पर गर्व करना चाहिए।
रैली में क्षेत्र-12 के बड़ी संख्या में सदस्यों ने सहभागिता कर जैन इतिहास, संस्कृति एवं संगठनात्मक गतिविधियों से संबंधित मार्गदर्शन प्राप्त किया। अंत में राष्ट्रीय मंत्री नरेशचंद जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।


