आगरा। शाबाश इंडिया।

छीपीटोला में दो जैन संघों का ऐतिहासिक वात्सल्य मंगल मिलन श्रद्धा, स्नेह और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। अंकलीकर परम्पराचार्य आचार्य श्री 108 सौभाग्यसागर जी महाराज एवं स्थविर संत श्री सुरत्नसागराचार्य जी महाराज ससंघ का मंगल आगमन हुआ, जहां मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज एवं मुनि श्री शीलसागर जी महाराज ससंघ ने वात्सल्य भाव से उनका स्वागत किया।
प्रातः 7 बजे आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज ससंघ ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, ताजगंज से मंगल विहार प्रारंभ किया। बिजलीघर चौराहे से होते हुए बैंड-बाजों, धर्मध्वजाओं और जयघोष के साथ संघ छीपीटोला जैन मंदिर पहुंचा। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर एवं वंदन कर संतों का स्वागत किया।
छीपीटोला जैन मंदिर परिसर में जैसे ही दोनों संघ आमने-सामने आए, पूरा वातावरण “जय-जय गुरुदेव” और “जय जिनेंद्र” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने विनयपूर्वक वंदना कर आचार्य एवं मुनिसंघ से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दुर्लभ वात्सल्य मंगल मिलन के साक्षी बने श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
मंगल मिलन के पश्चात जिन अभिषेक दर्शन संपन्न हुए। इसके बाद दोनों संघ एक साथ निर्मल सदन के लिए मंगल विहार करते हुए धर्मसभा स्थल पहुंचे। इस अवसर पर छीपीटोला पंचायती मंदिर कमेटी एवं आगरा दिगंबर जैन परिषद के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज के चरण प्रक्षालन कर श्रद्धाभाव से वंदन किया तथा समस्त आचार्य संघ के समक्ष शास्त्र भेंट कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
निर्मल सदन में आयोजित विशाल धर्मसभा में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु परंपरा का वात्सल्य और संतों का आपसी स्नेह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। जब संत एक मंच पर विराजमान होते हैं, तो समाज को धर्म, अनुशासन, संस्कार और संगठन की नई दिशा प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म साधना, संयम और सदाचार को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
मुनि श्री ने इस ऐतिहासिक वात्सल्य मंगल मिलन को समाज की एकता और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक बताया।
धर्मसभा के दौरान जयपुर हाउस जैन समाज ने अंकलीकर परम्पराचार्य आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज ससंघ के चरणों में श्रीफल भेंट कर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, जयपुर हाउस में मंगल चातुर्मास हेतु विनम्र निवेदन किया।
स्थविर संत श्री सुरत्नसागराचार्य जी महाराज ने कहा कि संतों का मिलन केवल व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म, संस्कार और आत्म जागरण का महापर्व होता है। ऐसे अवसर समाज में एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी को धर्ममय जीवन अपनाने एवं संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
इस ऐतिहासिक आयोजन में आगरा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने इसे आगरा जैन समाज के लिए ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय क्षण बताया।
कार्यक्रम का संचालन पंडित विजय जैन ने किया।
इस अवसर पर मनोज जैन बल्लो, मुरारीलाल जैन, दीपक जैन, जगदीश प्रसाद जैन, मनोज जैन बाकलीवाल, अभिषेक जैन, आशु बाबा, सतेन्द्र जैन, राकेश जैन परदेवाले, सुबोध पाटनी, नीरज जैन (जिनवाणी चैनल), राजीव जैन, दिलीप जैन मीडिया प्रभारी, शुभम जैन, एनसीसी क्लब छीपीटोला के सदस्य एवं छीपीटोला जैन समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


