जयपुर। शाबाश इंडिया।

मन की शुद्धि के साथ-साथ तन की शुद्धि भी आवश्यक है। प्रभु की भक्ति और गुरु की आहार क्रिया आदि कार्यों में 16 प्रकार की शुद्धियों का पालन करना चाहिए। यह प्रेरक विचार आर्यिका विष्णुप्रभा माताजी ने नेमी सागर कॉलोनी में आयोजित प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।
श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष जे.के. जैन कालाडेरा ने बताया कि पूज्य आर्यिका संघ का प्रवास नेमी सागर कॉलोनी में चल रहा है। प्रवचन से पूर्व धार्मिक विधि-विधान के साथ विभिन्न कार्यक्रम संपन्न हुए।
इस अवसर पर श्री रूपचंद एवं मंजू पाण्ड्या परिवार को पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्री महावीर एवं मंजू भानगडिया परिवार ने दीप प्रज्वलन किया, जबकि जे.के. जैन कालाडेरा परिवार द्वारा शास्त्र भेंट किया गया।
आर्यिका विष्णुप्रभा माताजी ने कहा कि बाहरी स्वच्छता के साथ आंतरिक पवित्रता भी आवश्यक है। जब मन निर्मल होता है और आचरण शुद्ध होता है, तभी भक्ति और साधना का वास्तविक फल प्राप्त होता है।
श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन समाज समिति के अनुसार पूज्य आर्यिका संघ का बुधवार प्रातः नेमी सागर कॉलोनी से मंगल विहार होगा।


