
सोनकच्छ | शाबाश इंडिया।
पुष्पगिरी तीर्थ सोनकच्छ में पट्ट विभूषण संस्कार महोत्सव का भव्य आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में हुआ। इस अवसर पर पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज ने अपने शिष्य अंतर्मना प्रसन्न सागर जी को अपने हाथों से पट्ट विभूषित कर नई जिम्मेदारी सौंपी। आयोजन को जैन समाज के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया गया।
पट्ट विभूषण संस्कार से पूर्व गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी ने अपने शिष्य का हाथ पकड़कर उन्हें मंत्रोच्चार के साथ नवीन चौकी के समक्ष लाया। गुरु ने शिष्य की नजर उतारी तो प्रसन्न सागर जी की आंखों से आंसू छलक उठे। गुरु ने उनके आंसू पोंछे, उन्हें गले लगाया और चौकी पर बैठाकर मस्तक पर केसर तिलक किया। इसके बाद पट्ट विभूषण के संस्कार संपन्न किए गए। भावुक कर देने वाले इस दृश्य को देखकर उपस्थित श्रद्धालु भी भावविभोर हो गए और पूरा परिसर गुरु-शिष्य के जयघोष से गूंज उठा।

पट्ट विभूषण के बाद अंतर्मना पट्टाचार्य प्रसन्न सागर जी ने अपने गुरु के चरण पखारे और चरणामृत को मस्तक से लगाया।
इस अवसर पर गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी ने कहा कि जब कोई व्यक्ति साधना और ध्यान में लीन रहता है, लंबे समय तक भोजन ग्रहण नहीं करता, फिर भी उसके चेहरे की आभा बनी रहती है तो उसे विभूषण बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय का भरोसा नहीं है, इसलिए अब जिम्मेदारी प्रसन्न सागर को संभालनी है।
पट्ट विभूषण संस्कार के बाद अंतर्मना प्रसन्न सागर जी ने कहा कि उन्हें दीक्षा लिए 37 वर्ष हो चुके हैं और उन्होंने कभी गुरुदेव के सामने बैठने का साहस नहीं किया, हमेशा नीचे ही बैठे हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बगल में इस आसन पर बैठने को लेकर उनके मन में संकोच था। उन्होंने कहा, “जिन शासन का एक ही धर्म है, जो गुरु अपने शिष्य को अपने जैसा बनाता है और अपने स्थान पर बैठाता है, यह उदारता जैन समाज में ही देखने को मिलती है।”
उन्होंने कहा कि जब तक वे गुरु के साथ रहेंगे, तब तक पप्पू परमपूज्य मुनि बनकर ही रहेंगे। उन्होंने गुरु से कहा कि आपने दांत दिए हैं, अब दाना भी देना। उन्होंने जैन समाज से आह्वान किया कि सभी लोग अच्छे समाजसेवी, अच्छे नागरिक और सच्चे देशवासी बनें तथा पंथवाद को मंदिर तक सीमित रखते हुए समाज और देश के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ें।
101 फीट के पोल पर लहराया 51 फीट का तिरंगा
आयोजन से पूर्व तीर्थ द्वारा संचालित मां जिनवाणी पब्लिक स्कूल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में गणाचार्य संघ ने विद्यार्थियों के साथ तीर्थ पहाड़ी पर 101 फीट ऊंचे पोल पर 51 फीट का विशाल तिरंगा फहराया। झंडा बंधन युवा उद्योगपति कमलेश हनी बानी जैन, इंदौर ने किया। इस दौरान वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो गया।
पट्ट विभूषण संस्कार समारोह का शुभारंभ अध्यक्ष अंतर्मना ट्रस्ट शांतिलाल बेलावत, संघपति दिलीप हुमड़ एवं गुरुभक्त सुभाष चूड़ीवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। मंगलाचरण मुनि नेगम सागर जी महाराज ने किया।
सिंहासन का लोकार्पण मनीष-सपना गोधा एवं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर ने किया। वहीं चौकी पर चंदन तिलक लगाने का सौभाग्य मनोज-शिल्पा झांझरी, हैदराबाद परिवार को मिला।
इस अवसर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गुरु पुष्पदंत सागर जी ने अंतर्मना आचार्य श्री के रूप में एक हीरा चुना है।
कवि कुमार विश्वास ने दी राष्ट्रभक्ति की स्वरधारा
शाम को गुरु भक्ति कार्यक्रम के बाद राष्ट्रवाणी के वरदपुत्र, कवि कुल कंठाभरण, ओज मार्तंड एवं छंद महोदधि डॉ. कुमार विश्वास ने गणाचार्य संघ के दर्शन किए। उन्होंने भगवान महावीर के गुणगान के साथ कवि सम्मेलन को दिशा प्रदान की।
कुमार विश्वास ने स्वतंत्रता दिवस की कविता के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हुए कहा कि फौजी देश के लिए जीता है। उन्होंने भगवान राम, भगवान कृष्ण और राष्ट्र से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके संबोधन और काव्य प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में विधायक डॉ. राजेश सोनकर, तीर्थ अध्यक्ष प्रकाश अजमेरा, सुभाष जैन, संयोजक प्रशांत गंगवाल, नवीन शास्त्री, कुलाधिपति प्रदीप गुप्ता तिजारा वाला, उज्ज्वल पाटनी, डॉ. संजय जैन, डीके जैन इंदौर, विवेक आलोक गंगवाल, संजीव जैन कोलकाता, रजत झांझरी, आयुष जैन भोपाल, नीरज गंगवाल राजिम, राजेश पाटनी, अनिल जैन बैंगलोर, प्रीतेश जैन जयपुर, समन्वयक आकाश जैन, संकल्प-विकल्प राजू सेठी, भरत बड़जात्या, एकत्व जैन सहित अनेक गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मंच संचालन मुनि पीयूष सागर जी एवं बा. ब्र. श्री तरुण भैया जी ने किया। आभार तीर्थ अध्यक्ष प्रकाश अजमेरा ने व्यक्त किया।
आयोजन की जानकारी प्रचार-प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी, सोनकच्छ, नरेंद्र अजमेरा एवं पियूष कासलीवाल, औरंगाबाद ने दी।


