
भीलवाड़ा | शाबाश इंडिया।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा आयोजित राष्ट्रसंत मनोज्ञाचार्य श्री 108 पुलकसागरजी महाराज ससंघ के चातुर्मास के दौरान सूर्यमहल में धर्मसभा आयोजित हुई। इस अवसर पर आचार्य श्री ने ज्ञान, आत्मकल्याण एवं सदाचार पर आधारित प्रेरणादायी धर्म संदेश प्रदान किया।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य को परमात्मा से वही मांगना चाहिए जिसे कभी छोड़कर न जाना पड़े। धन, वैभव और भौतिक सुख क्षणभंगुर हैं, जबकि ज्ञान ऐसा अमूल्य धन है जो जीवन को सही दिशा देता है और आत्मा के साथ रहता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान ही वास्तविक जिनगुण संपत्ति है, लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए पात्रता, विनम्रता और ग्रहण करने की तीव्र इच्छा आवश्यक है।
उन्होंने विभिन्न दृष्टांतों के माध्यम से कहा कि राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को जीवन से दूर किए बिना सम्यक ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। पहले प्रभु और गुरु की वाणी को सुनना, फिर उसका मनन करना और अंततः उसे जीवन में उतारना आवश्यक है। इसी मार्ग से सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र रूपी रत्नत्रय की प्राप्ति होती है।
आचार्य श्री ने कहा कि परमात्मा और गुरु सदैव समभाव रखते हुए सर्वहित, सर्वकल्याण और परमार्थ का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने भीलवाड़ावासियों से 15 अगस्त से चित्रकूटधाम में आयोजित होने वाले ज्ञान गंगा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि इस महोत्सव में जीवन को सुखी, संतुलित और सार्थक बनाने वाले अनेक प्रेरक सूत्र प्राप्त होंगे।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि धर्मसभा के प्रारंभ में दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य बिजयनगर निवासी सुभाषचंद, प्रियांशु एवं निर्वाण कासलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। धर्मसभा में भीलवाड़ा शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
समिति के संयोजक मनीष शाह ने बताया कि 14 अगस्त तक सूर्यमहल में प्रतिदिन प्रातः 8:30 से 10:00 बजे तक प्रवचन तथा सायं 7:00 से 8:00 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है।
सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि चातुर्मास का मुख्य आकर्षण ज्ञान गंगा महोत्सव 15 से 30 अगस्त तक चित्रकूटधाम में आयोजित होगा। महोत्सव में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आचार्य श्री पुलकसागर महाराज के मुखारविंद से धर्मोपदेश का लाभ प्राप्त करेंगे। देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के महोत्सव में शामिल होने की संभावना है।


