
इंदौर | शाबाश इंडिया।
राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ चातुर्मास का शुभारंभ इंदौर में ऐतिहासिक मंगल कलश स्थापना समारोह के साथ हुआ। विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि “धर्म और गुरु कृपा का मूल्य धन से नहीं, बल्कि समर्पण से चुकाया जाता है। जिंदगी भर की कमाई भी यदि समर्पित कर दो, तब भी गुरु की अमृतवाणी की एक बूंद का मूल्य नहीं चुकाया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि दीक्षा, त्याग और आत्मकल्याण का मार्ग अनमोल है। पुण्य से प्राप्त धन-संपत्ति, परिवार और वैभव का त्याग ही वास्तविक साधुता की पहचान है। धर्म की एक बूंद भी जीवन को अमृतमय बना देती है, लेकिन उसके लिए पूर्ण समर्पण आवश्यक है।
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज 18 पिच्छिकाओं एवं 20 से अधिक त्यागव्रतियों के साथ इंदौर में चातुर्मास कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कार्यों से समय निकालकर चातुर्मास का अधिकतम लाभ लें।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। दीप प्रज्ज्वलन का सौभाग्य मनीष-सपना, नवीन गोधा, अशोक-रानी दोशी, आनंद गोधा, आकाश कोयला, हर्ष जैन, धर्मेन्द्र जैन सहित अन्य प्रमुखजनों को प्राप्त हुआ।
चातुर्मास समिति के प्रमुख नवीन गोधा ने कहा कि इंदौर में आयोजित यह चातुर्मास हर दृष्टि से ऐतिहासिक बनाया जाएगा और पूरे देश से श्रद्धालु इसमें सहभागी बनेंगे।
धर्मसभा में मुनिश्री ने त्याग, तप, दान और समर्पण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म को कभी मूल्य से नहीं, बल्कि अनमोल भाव से स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजदूर की कमाई शरीर के पसीने की और सच्चे जैन की कमाई बुद्धि के परिश्रम की होती है। सच्चे समर्पण के बिना धर्म का वास्तविक अनुभव संभव नहीं है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


