Wednesday, July 15, 2026

आचार्य श्री 108 सुंदर सागर जी महाराज का 31वां संयम दीक्षा दिवस गुरु उपकार दिवस के रूप में मनाया

फागी में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ने गुरु महिमा, जिनवाणी और भगवान की दिव्य देशना का बताया महत्व

फागी | शाबाश इंडिया।

फागी कस्बे के पार्श्वनाथ चैत्यालय में विराजमान जैनाचार्य श्री 108 सुंदर सागर जी महाराज का 31वां संयम (दीक्षा) दिवस गुरु उपकार दिवस के रूप में सकल दिगम्बर जैन समाज फागी के तत्वावधान में हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया।

राजस्थान जैन महासभा शाखा फागी के महामंत्री राजाबाबू गोधा ने बताया कि इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि 30 वर्ष पूर्व उन्होंने सन्मति सागर महाराज से दीक्षा ग्रहण कर अपना जीवन गुरु चरणों में समर्पित कर दिया था। उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर सही मार्ग दिखाते हैं और मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

आचार्य श्री ने कहा कि यदि जीवन में भगवान और गुरु दोनों का सान्निध्य प्राप्त हो तो पहले गुरु के चरणों का वंदन करना चाहिए, क्योंकि गुरु का अनुभव और आशीर्वाद ही जीवन की नैया को पार लगाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में शांति और प्रगति के लिए गुरु चरणों में रहकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते रहें। गुरु का समागम ही मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करता है।

जिनवाणी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जैन धर्म में जिनवाणी को माता का दर्जा दिया गया है। जिनवाणी के श्रवण से पाप कर्मों की निर्जरा होती है और मनुष्य को सच्चे ज्ञान एवं मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि पुण्य कर्मों के उदय और प्रभु कृपा से ही जीव को वीतराग वाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

अरिहंत भगवान की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि अरिहंत भगवान संसार के सबसे बड़े उपकारी हैं, क्योंकि वे जीवों को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। णमोकार महामंत्र को अनादि और सर्वोच्च मंत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पंच परमेष्ठी—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु—के गुणों को नमन करता है। इसके स्मरण से मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

भगवान की दिव्य देशना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने कहा कि भगवान की दिव्य वाणी सुनने से क्रूर और पापी व्यक्ति के भाव भी बदल जाते हैं। उनके मन से कषाय और पाप दूर होकर वे भवसागर से पार होने का मार्ग प्राप्त करते हैं।

कार्यक्रम में जेके जैन (कोटा वाले, वैशाली नगर), हेमचंद छाबड़ा (मानसरोवर), राजेश गंगवाल एवं गजेंद्र पाटनी ने चित्र अनावरण किया। विष्णु बोहरा, नेमीचंद जैन (निवाई), मिलाप चंद जैन (किशनगढ़), सुमेर बड़जात्या (मालपुरा) ने दीप प्रज्ज्वलित किया।

इस अवसर पर महावीर प्रसाद, नवरत्न जैन, रामोतार जैन, विनोद कुमार, पंकज कुमार कठमाना एवं कठमाना परिवार को आचार्य श्री को पिच्छिका भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। महावीर कुमार अजमेरा एवं मनीष अजमेरा परिवार ने पाद प्रक्षालन किया। फूलचंद, अशोक कुमार एवं मुकेश कुमार गिंदौड़ी परिवार ने पंचामृत अभिषेक किया। वहीं भागचंद, राजकुमार, महेंद्र कुमार एवं माणकचंद कासलीवाल परिवार ने जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त किया।

कार्यक्रम में 21 परिवारों द्वारा सभी त्यागी-व्रतियों को शास्त्र भेंट किए गए। इसके साथ ही आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज की विभिन्न मंत्रोच्चारणों, मंडलों एवं व्यंजनों के माध्यम से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।

मंदिर समिति के अध्यक्ष महावीर झंडा, मंत्री कमलेश चौधरी एवं सरावगी समाज के अध्यक्ष महावीर अजमेरा ने बताया कि कार्यक्रम में दिल्ली, जयपुर, सांगानेर, रेनवाल, माधोराजपुरा, लदाना, नीमेडा, मेहंदवास, डिग्गी, मालपुरा, केकड़ी, निवाई, पचेवर, मंडावरी, चौरू, चकवाड़ा सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

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