धोद (सीकर)। शाबाश इंडिया।

राजकीय अतिथि वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि भक्ति की शक्ति से संयम धारण कर मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर स्वामी की परंपरा में जन्म लेना हम सभी का सौभाग्य है, क्योंकि मंदिरों में उनकी पूजा-अर्चना का अवसर प्राप्त होना हमारे जीवन का महान पुण्य है।
आचार्य श्री 14 जुलाई को धोद नगर प्रवेश के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे 52 वर्ष पूर्व धोद आए थे, तब यह गांव था, लेकिन आज नगर बन चुका है। गांव या नगर का छोटा-बड़ा होना महत्वपूर्ण नहीं है। यदि मन विशाल हो तो छोटा नगर भी महान बन जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि और जन्मदात्री माता के प्रति सदैव प्रेम और सम्मान बनाए रखना चाहिए। व्यक्ति चाहे अपनी जन्मभूमि से कितना भी दूर क्यों न चला जाए, उसे कभी नहीं भूलना चाहिए।
आचार्य श्री ने आसाम और मणिपुर से आए वाद्य एवं नृत्य दलों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने राजस्थान और मणिपुर को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांध दिया। यह भक्ति का ही प्रतिफल है।
उन्होंने कहा कि श्रावक देव, शास्त्र और गुरु का भक्त होता है तथा संघ का सानिध्य दीर्घकाल तक प्राप्त करने की भावना रखता है। उसी प्रकार साधु भी अपने दीक्षा गुरु और शिक्षा गुरु के प्रति भक्ति एवं वंदना का भाव रखते हैं। उन्होंने बताया कि जयपुर से बिहार की यात्रा के दौरान उन्होंने संकल्प लिया था कि वे अपने शिक्षा गुरु एवं दीक्षा गुरु की समाधि स्थली के दर्शन अवश्य करेंगे।
डॉ. राजेश पंचोलिया एवं श्री हितेश रारा मारोठ ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 10 मुनिराज, 20 आर्यिका माताजी, एक ऐलक, चार क्षुल्लक एवं एक क्षुल्लिका सहित कुल 37 पिच्छियों के साथ धोद नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शोभायात्रा में आसाम और मणिपुर के वाद्य एवं नृत्य दलों ने आकर्षक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। शोभायात्रा का समापन श्री चंद्रप्रभ जिनालय में हुआ।
कार्यक्रम स्थल पर मुख्य जजमान पाटनी परिवार, कोलकाता द्वारा ध्वजारोहण किया गया। इसके पश्चात मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन तथा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों को प्राप्त हुआ। जिनवाणी सेवा का लाभ भी श्रद्धालु परिवारों ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर विभिन्न नगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। दोपहर में आचार्य श्री की पूजन एवं भक्ति नृत्य का आयोजन हुआ। शाम को भगवान श्रीजी एवं आचार्य श्री की आरती के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
— डॉ. राजेश पंचोलिया, इंदौर


