ब्यावरा/शाबाश इंडिया।

राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने ब्यावरा से इंदौर की ओर मंगल विहार किया। विहार से पूर्व आयोजित धर्मसभा में उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अभिषेक एवं शांतिधारा को विधि-विधानपूर्वक करने से उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि संसार के सभी जीवों के सुखी रहने की भावना में अपार शक्ति निहित है और सच्ची भक्ति से आत्मा की आंतरिक शक्तियों का जागरण होता है।
मुनि श्री ने कहा कि भक्ति के लिए बाहरी आडंबर की अपेक्षा निर्मल एवं पवित्र भाव आवश्यक हैं। यदि व्यक्ति निष्काम भाव से प्रभु भक्ति में लग जाए और विधिपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान करे तो उसका शुभ परिणाम अवश्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि अभिषेक एवं शांतिधारा की प्रत्येक विधि का अपना विशेष महत्व है, इसलिए इसे पूरी श्रद्धा और शास्त्रोक्त विधि से संपन्न करना चाहिए।
धर्मसभा में मध्यप्रदेश जैन महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि ब्यावरा के मूलनायक भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी की भूगर्भ से प्राप्त प्रतिमा पर राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में पहली बार विश्व कल्याण की भावना से महाशांतिधारा का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक आयोजन का सौभाग्य डॉ. दिलीप बोबरा, अरविंद कुमार बोबरा परिवार तथा विनोद कुमार बैद्य परिवार (ईसागढ़) सहित अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर इन परिवारों का सम्मान भी किया जाएगा।
अपने प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि संसार में अनेक लोग दुःखी हैं और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उनकी सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी व्यक्तिगत चिंताओं से ऊपर उठकर जगत के कल्याण की भावना रखें तो हमारा स्वयं का कल्याण भी निश्चित होता है। जब व्यक्ति अपनी चिंता छोड़ देता है, तब समाज और संसार उसकी चिंता करने लगता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन विधिपूर्वक महाशांतिधारा करते हुए विश्व शांति एवं मानव कल्याण की भावना रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध भाव से किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का सकारात्मक प्रभाव समाज और जीवन दोनों पर अवश्य दिखाई देता है।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने राष्ट्रसंत श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल विहार के दौरान उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।


