Wednesday, June 3, 2026

पेड़ से कितने भी फल लो, उसे तो फलते जाना है : मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज

अशोकनगर से विहार कर शाढ़ौरा में किया भव्य मंगल प्रवेश, श्रमण संस्कृति शिविर का हुआ समापन

शाढ़ौरा/अशोकनगर. शाबाश इंडिया। राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ ने अनियत विहार की परंपरा को चरितार्थ करते हुए मंगलवार प्रातः अशोकनगर से शाढ़ौरा के लिए मंगल विहार किया। प्रातः लगभग 6:30 बजे 18 पिच्छिकाधारी संतों के साथ विहार करते हुए मुनिश्री शाढ़ौरा पहुंचे, जहां जैन समाज ने बैंड-बाजों और जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

शाढ़ौरा में आयोजित धर्मसभा के दौरान श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में संसदीय क्षेत्र अशोकनगर, गुना एवं शिवपुरी के विभिन्न नगरों में संचालित श्रमण संस्कृति शिक्षण शिविरों का समापन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिविरों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्वानों को सम्मानित किया गया।

समारोह की शुरुआत में जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के 28 नगरों में आयोजित शिविरों का समापन समारोह मूल रूप से अशोकनगर में प्रस्तावित था, लेकिन मुनिश्री के शाढ़ौरा विहार के कारण इसे यहां आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) से आए 50 से अधिक विद्वानों ने भीषण गर्मी में समाज के बच्चों और युवाओं को धर्म एवं संस्कारों की शिक्षा देकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष राकेश कासल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री विजय धुर्रा तथा डॉ. भरत जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने विजेता विद्यार्थियों एवं विद्वानों को स्मृति चिन्ह, पीत वस्त्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में पेड़ से सीखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “पेड़ से कितने भी फल ले लो, उसे तो निरंतर फलते रहना है। वह दूसरों को छाया देता है, फल देता है और बदले में कुछ नहीं मांगता। मनुष्य को भी ऐसा ही जीवन जीना चाहिए।”

मुनिश्री ने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां और संकट आएं, धैर्य नहीं खोना चाहिए। जैसे पेड़ काटे जाने के बाद भी पुनः हरा-भरा हो जाता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी विपरीत परिस्थितियों में साहस और आत्मबल बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने श्रमण संस्कृति संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि संस्था देशभर में ज्ञान और संस्कारों की ज्योति जला रही है। शिविरों में बच्चों और युवाओं को दिए गए संस्कार उनके जीवनभर काम आएंगे। उन्होंने शिविर के सफल आयोजन के लिए आयोजकों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों को आशीर्वाद प्रदान किया।

मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से गुरु और धर्म के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में ऐसे अवसर विरले ही मिलते हैं, जो व्यक्ति की आध्यात्मिक झोली को भर देते हैं। गुरु की अगवानी और सेवा का पुण्य जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।

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