
सम्मेद शिखरजी | शाबाश इंडिया।
जैन धर्म के सर्वोच्च तीर्थ एवं सिद्धों की पावन भूमि सम्मेद शिखरजी में परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ 21 जुलाई को झंडारोहण एवं मांगलिक क्रियाओं के साथ श्रद्धापूर्वक हुआ।
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि विधान में सहभागी सभी इंद्र-इंद्राणियाँ सर्वप्रथम गुणायतन में एकत्रित हुए। वहां से 108 प्रतिमाओं एवं मंगल कलशों के साथ भव्य शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल पहुँची, जहाँ विधिवत झंडारोहण, पंडाल उद्घाटन तथा मुख्य मंडल सहित सभी 108 मंडलों पर भगवान की प्रतिमाओं का विराजमान कराया गया। इसके पश्चात अभिषेक की मांगलिक क्रियाएँ संपन्न हुईं।
इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने सिद्ध भक्ति कराते हुए अपने मंगल प्रवचनों में सिद्ध क्षेत्र पर सिद्धचक्र महामंडल विधान के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के महापर्व अष्टान्हिका के दौरान सिद्धों की आराधना एवं सिद्धचक्र विधान का अनुष्ठान अनंत पुण्य का कारण बनता है तथा आत्मकल्याण का श्रेष्ठ माध्यम है।
इसके बाद संस्कृत विधि-विधान के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आठ अर्घ्य समर्पित किए। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रावक-श्राविकाएँ बड़ी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सिद्धों की आराधना में सहभागी बने।
उदयभान जैन ने बताया कि सिद्धभूमि सम्मेद शिखरजी के विभिन्न मंदिरों में भी सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजित किए जा रहे हैं। शांति सागर धाम में प्रतिष्ठाचार्य पंडित विमल जी बनेठा वाले के निर्देशन में विधान संपन्न हो रहा है, जिसमें जयपुर से अनिल जैन पाटनी (काशीपुर वाले) के नेतृत्व में सैकड़ों श्रद्धालु सहभागी हैं।
वहीं तेरहपंथी कोठी में परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के धर्मप्रभावक शिष्य उपाध्याय श्री बृषभानन्दी जी महाराज एवं मुनि श्री वैराग्यनन्दी जी महाराज के सानिध्य में सिद्धाचलम में भी सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजित किया जा रहा है। इसमें महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से धर्मावलंबी सहभागी बने हुए हैं। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा की ज्योति पाटनी (नागपुर) अपनी टीम के साथ विधान में भाग ले रही हैं। गुणायतन में जयपुर से गुणमाला, सुनील-लता सोगाणी (गायत्री नगर, महारानी फार्म) सहित अनेक परिवार विधान पूजा में सहभागिता निभा रहे हैं।
रात्रि में महाआरती एवं सामूहिक जाप का आयोजन भी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ।
उदयभान जैन ने बताया कि 22 जुलाई को प्रातः 5:30 बजे से मांगलिक क्रियाएँ प्रारंभ होंगी। प्रातः 7:30 बजे सिद्ध भक्ति के उपरांत द्वितीय दिवस के विधान में 16 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।


