
जयपुर | शाबाश इंडिया।
धावास जैन मंदिर में आदिसागर अंकलीकर परम्परा के दिगम्बर जैन संत चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुविज्ञमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान पूजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जारी है। विधान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मंदिर समिति के संरक्षक जय कुमार जैन बड़जात्या ने बताया कि नौ दिवसीय विधान का निर्देशन बाल ब्रह्मचारिणी श्रेया दीदी एवं प्रतिष्ठाचार्य अक्षय जैन भैया के निर्देशन में किया जा रहा है। विधान के दूसरे दिन रेणु-अनिल छाबड़ा परिवार को दीप प्रज्ज्वलन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बैद ने बताया कि आर्यिका सुविज्ञमति माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्त की वास्तविक परीक्षा संकट के समय होती है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने नियम, श्रद्धा और प्रभु के प्रति समर्पण से विचलित नहीं होता, वही सच्चा भक्त कहलाने योग्य है। उन्होंने कहा कि एक बार नियम लेने के बाद उस पर दृढ़ रहना ही साधना की सफलता का मूल आधार है।
आर्यिका माताजी ने कहा कि सच्चा भक्त वही है, जो सच्चे देव, शास्त्र और गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा एवं समर्पण का भाव रखता है तथा जीवन में संयम और नियमों का पालन करता है।
कार्यकारिणी सदस्य सीमा बड़जात्या ने बताया कि विधान में सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य श्रीमती डिम्पल जैन, दीपन एवं यश जैन गोधा परिवार तथा अरूणा-विनीत जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
सिद्धचक्र महामंडल विधान समिति के मंत्री मितेश ठोलिया एवं सह मंत्री नरेन्द्र गोधा ने बताया कि कुबेर बनने का सौभाग्य जय कुमार जैन बड़जात्या तथा यज्ञनायक बनने का सौभाग्य हैमेन्द्र-सरिता लुहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ।
सह मंत्री मनोज जैन पचेवर ने बताया कि पूज्य माताजी के पाद-प्रक्षालन का सौभाग्य श्री सन्मति सुनीलम् महिला मंडल को प्राप्त हुआ, जबकि मैना सुन्दरी-श्रीपाल बनने का सौभाग्य राजीव जैन, जयसिंहपुरा खोर परिवार को मिला।


