
जयपुर | शाबाश इंडिया।
क्षमा मूर्ति आचार्य 108 विशद सागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि विशाल सागर महाराज के 72 दिनों के तीन चौबीसी व्रत एवं उपवास की साधना पूर्ण होने पर भव्य महापारणा महोत्सव आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और मुनि श्री के आहार ग्रहण करते ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
राजस्थान जैन युवा महासभा जयपुर के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि मुनि विशाल सागर महाराज ने 28 जुलाई से तीन चौबीसी व्रत की साधना प्रारंभ की थी। इस दौरान उन्होंने पूर्ण रूप से अन्न का त्याग रखा तथा जल और नारियल पानी आदि ही आहार के रूप में ग्रहण किया।
एयरपोर्ट रोड स्थित पार्श्वनाथ नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि श्री की 13 घंटे की अखंड मौन साधना के उपरांत 72 दिनों से चल रहे अन्न त्याग के तीन चौबीसी व्रत का समापन हुआ। इस अवसर पर महापारणा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर तपस्या की अनुमोदना की। मुनि श्री के आहार के प्रथम ग्रास का पुण्यार्जन मनीष-सीमा बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। मुनि श्री के आहार ग्रहण करते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ अनुमोदना की।
पारणा महोत्सव के दौरान राजस्थान जैन सभा जयपुर के अध्यक्ष सुभाष चंद जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप जैन, उपाध्यक्ष विनोद जैन कोटखावदा, भागचंद-कांता बाकलीवाल, विमल बाकलीवाल, राजन-शिप्रा बज, नवराज जैन सहित अन्य गणमान्यजनों ने मुनि श्री की तपस्या की अनुमोदना करते हुए पुण्यार्जन किया।
समवशरण महामंडल विधान के दौरान गुरुवार रात 48 मंडलीय भक्तामर स्तोत्र दीप महाअर्चना अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ नृत्य करते हुए मंडल पर दीपक अर्पित किए। दीप महाअर्चना के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर रहा।
आचार्य विशद सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में चल रहे छह दिवसीय समवशरण महामंडल विधान पूजा में शुक्रवार को प्रातः अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद विधान पूजा संपन्न हुई। मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने अष्ट द्रव्य के अर्घ्य अर्पित किए। विमल बाकलीवाल ने बताया कि सायंकाल महाआरती के बाद लघु नाटिका की प्रस्तुति भी दी गई।
नवराज जैन ने बताया कि शनिवार, 3 अक्टूबर को छह दिवसीय समवशरण महामंडल विधान का भव्य समापन होगा। प्रातः श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान की पूर्णाहुति होगी। सायंकाल श्रीजी का कलशाभिषेक किया जाएगा।


