
जयपुर | शाबाश इंडिया।
सुबोध पब्लिक स्कूल, एयरपोर्ट, सांगानेर में भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा, आध्यात्मिकता और सृजनात्मक संभावनाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से 8 अगस्त को ‘Classical Chronicles – Indian Classical Music Workshop’ का आयोजन किया गया। कैंपस ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए संगीत, कला और सीखने का प्रेरणादायी अनुभव बनी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती आशी श्रीवास्तव, उप-प्रधानाचार्य, प्रशासनिक अधिकारियों एवं आमंत्रित कलाकारों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के संदेश के साथ ज्ञान, कला एवं संगीत की ज्योति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। इसके बाद णमोकार मंत्र के सामूहिक पाठ से वातावरण आध्यात्मिक एवं सकारात्मक ऊर्जा से भर गया।
प्रधानाचार्या श्रीमती आशी श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कला एवं संगीत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने, निरंतर अभ्यास करने तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की समग्र शिक्षा की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में कला एवं संगीत की भूमिका को समझाना रहा। विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्वर, ताल, लय एवं भाव की मूलभूत अवधारणाओं के साथ संगीत के रचनात्मक एवं व्यावसायिक अवसरों की जानकारी भी दी गई।
कार्यशाला में प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक श्री विक्रम श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की बारीकियों से परिचित कराया। उनके साथ तबला वादक श्री वरुण शर्मा एवं हारमोनियम वादक श्री कुलदीप पंवार ने प्रभावी संगत प्रस्तुत की।
संगीत सत्र का आरंभ राग भैरव के आलाप से हुआ। इसके बाद एकताल की अति-विलंबित लय में पारंपरिक रचना ‘बिना हरि कौन’ तथा द्रुत लय में ‘जागो मोहन प्यारे’ की प्रस्तुति दी गई। विद्यार्थियों को एक ही राग में विलंबित एवं द्रुत गायन की विविध अनुभूतियों को समझने का अवसर मिला।
इसके बाद राग मियां की तोड़ी की प्रस्तुति हुई, जिसमें उस्ताद बड़े गुलाम अली खां की रचना ‘अल्लाह जाने मौला जाने’ को द्रुत तीनताल में प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात ‘हे जननी मैं न जियूं बिन राम’ और ‘चलो मन वृंदावन की ओर’ जैसे भावपूर्ण भजनों ने सभागार को भक्तिमय वातावरण से भर दिया।
कार्यक्रम में कलाकारों को शॉल, स्मृति-चिह्न एवं विद्यालय के कला एवं शिल्प विभाग द्वारा निर्मित विद्यालय-पेंटिंग भेंट कर सम्मानित किया गया। कलाकारों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए संगीत साधना में अनुशासन, धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण के महत्व को समझाया।
समापन अवसर पर उप-प्रधानाचार्य ने कलाकारों, आयोजकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। ‘Classical Chronicles’ ने विद्यार्थियों के मन में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति जिज्ञासा, सम्मान और अनुराग जगाते हुए यह संदेश दिया कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना, अनुशासन, आत्म-अभिव्यक्ति और संस्कृति से जुड़ने का सशक्त माध्यम है।


