
पुरुलिया, पश्चिम बंगाल | शाबाश इंडिया।
पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के सराक क्षेत्र में दसलक्षण महापर्व धर्म प्रभावना के साथ संपन्न हुआ। तीनों राज्यों के करीब 50 गांवों से लगभग 2 हजार लोगों ने पर्व के धार्मिक आयोजनों में सहभागिता की। अंतिम दिन जल विहार और भव्य शोभायात्रा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
परम पूज्य सराकोद्धारक आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा तथा परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्ष माताजी एवं आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी के आशीर्वाद से ब्रह्मचारिणी मंजुला दीदी के निर्देशन में दसलक्षण महापर्व के आयोजन हुए। 16 से 25 सितंबर 2025 तक प्रतिदिन विभिन्न मंदिरों में नित्य नियम पूजन, आरती, प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में बनारस, उत्तर प्रदेश से आए पं. मनीष शास्त्री, पं. सुभाष शास्त्री, पं. आकाश शास्त्री, पं. हर्षल शास्त्री एवं पं. अरिहंत शास्त्री ने धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराए। पुरुलिया जिले में मध्यप्रदेश से आए पं. मुन्नालाल जैन सागर एवं पं. राजकुमार जैन कर्द ने आयोजन में मार्गदर्शन दिया। ओडिशा में हेमंत जैन सराक तथा झारखंड में सृष्टिधर, अनुज जैन एवं अमित जैन की सहभागिता रही।
झारखंड से सृष्टिधर जैन ने बताया कि सराक क्षेत्र में वर्ष 1993 से लगातार आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का पदार्पण होता रहा है। उनकी प्रेरणा से सराक समाज जैन समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए निरंतर सक्रिय है। उन्होंने बताया कि सराक समाज अपने जैन होने और पूर्वजों के जैन होने के इतिहास से परिचित है। आचार्यश्री की प्रेरणा से क्षेत्र में अनेक जिन मंदिरों के निर्माण के साथ कंप्यूटर सेंटर, सिलाई सेंटर एवं होम्योपैथिक क्लिनिक का संचालन भी निरंतर किया जा रहा है।
सराक ट्रस्ट के संजय पाटनी, रांची एवं सृष्टिधर सराक जैन के सहयोग से झारखंड के अनेक गांवों में ज्ञान एवं संस्कार शिक्षण शिविर आयोजित किए गए। संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया कि प्रतिवर्ष शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन शिविरों के साथ दसलक्षण पर्व के दौरान भी धार्मिक एवं संस्कारमूलक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
ब्रह्मचारिणी मंजुला दीदी ने बताया कि सराकोद्धारक आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में करीब 8 लाख सराक समाज के उत्थान के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रावक से सराक बने समाज के लोगों का इतिहास आज का नहीं, बल्कि बहुत पुराना है और उनके सामाजिक एवं धार्मिक विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
आयोजन में स्थानीय सराक समिति अध्यक्ष पुटुक सराक जैन, रघुनाथपुर, गया राम जैन, अध्यक्ष लखनपुर, संजय सराक जैन, सचिव डॉ. प्रदीप जैन, लखन सराक जैन, राजामेला, सेंटर कार्यकर्ता गौरांग रामदुलार सहित अनेक कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। शक्तिपथ, भारतवर्षीय दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट, जैनम फाउंडेशन दिल्ली तथा पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं ओडिशा की स्थानीय सराक समितियों का भी आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।


