
भीलवाड़ा | शाबाश इंडिया।
श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी ने कहा कि किसी व्यक्ति की महानता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, सदाचार और आत्मपुरुषार्थ से निर्धारित होती है। उच्च कुल में जन्म लेना तभी सार्थक है, जब जीवन भी उसी के अनुरूप श्रेष्ठ बने। उन्होंने यह विचार राष्ट्रसंत आचार्य आनंद ऋषिजी महाराज की 126वीं जन्मजयंती पर नवदिवसीय कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर शांतिभवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।
युवाचार्यश्री ने स्थानांग सूत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्यों के चार प्रकार बताए गए हैं—श्रेष्ठ कुल और श्रेष्ठ आचार वाले, श्रेष्ठ कुल में जन्म लेकर भी आचार से पतित होने वाले, सामान्य कुल में जन्म लेकर सदाचार से महान बनने वाले तथा वे, जिनमें न कुल की श्रेष्ठता होती है और न ही आचार की। उन्होंने कहा कि वास्तविक सम्मान जन्म से नहीं, बल्कि चरित्र और जीवन मूल्यों से मिलता है।
उन्होंने तीर्थंकरों, चक्रवर्तियों और महापुरुषों के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि कुल का गौरव तभी सार्थक है, जब उसके अनुरूप संयम, विनय, तप, अनुशासन और आत्मजागरण का जीवन जिया जाए। केवल वंश की प्रतिष्ठा किसी को महान नहीं बनाती।
राष्ट्रसंत आचार्य आनंद ऋषिजी महाराज के जीवन का उल्लेख करते हुए युवाचार्यश्री ने कहा कि धार्मिक वातावरण, माता-पिता से मिले संस्कार और आत्मचिंतन ने बालक नेमीचंद को आगे चलकर युगप्रभावक आचार्य आनंद ऋषिजी के रूप में स्थापित किया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि महानता संस्कारों को पुरुषार्थ में बदलने से प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला परिवार होता है। माता-पिता का आचरण, देव-गुरु-धर्म के प्रति श्रद्धा और घर का संस्कारमय वातावरण ही बच्चों के व्यक्तित्व की नींव रखता है। इसलिए नई पीढ़ी को केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि धर्म, अनुशासन, विनय और आदर्श जीवन के संस्कार देना प्रत्येक परिवार का दायित्व है।
धर्मसभा के दौरान बड़ी संख्या में तपस्वी भाई-बहनों ने 7, 5, 3 और 1 उपवास, आयंबिल तथा एकासन के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। आठ उपवास पूर्ण करने पर तपस्वी राजेन्द्र संकलेचा का श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया।
शांतिभवन आनंद अनुभूति चातुर्मास के मंत्री नवरतनमल भलावत ने बताया कि 23 अगस्त को खेरोदा में संयम अंगीकार करने जा रहे मुमुक्षु कांतिलाल गांधी ने युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी सहित संत-साध्वीवृंद से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर श्रीसंघ के पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने दीक्षार्थी कांतिलाल गांधी की खोलभर की रस्म संपन्न कर उनका बहुमान किया तथा संयम पथ पर अग्रसर होने की मंगलकामनाएं दीं।


