Friday, March 6, 2026

संसार का सबसे शक्तिशाली देव सौधर्म इन्द्र करते हैं प्रभु का प्रथम अभिषेक

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भव्य शोभायात्रा ने इतिहास रचते हुए हमारे जीवन को धन्य किया – प्रदीप भैया
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संगीत के साथ हुए भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह में टूटे सभी रिकॉर्ड – विजय धुर्रा

अशोक नगर। श्री मद् जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव, विश्व शांति महायज्ञ एवं गजरथ महोत्सव का आयोजन तीर्थ चक्रवर्ती मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में भव्य रूप से संपन्न हो रहा है। इसी क्रम में आज दोपहर बाद श्री दिगम्बर जैन युवा वर्ग के संयोजन एवं दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह आयोजित किया गया।

इस अवसर पर परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ ने अपनी पुरानी पिच्छिका त्याग कर नवीन पिच्छिका ग्रहण की। यह पिच्छिका दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में दीक्षा के प्रसंग से जुड़ी हुई थी।

जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि मंडी प्रांगण स्थित अयोध्या नगरी में दोपहर एक बजे से संगीत के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मंत्री शैलेन्द्र श्रागर के मधुर भजनों तथा बालिका जैन युवा वर्ग द्वारा प्रस्तुत संगीतमय नृत्य ने समारोह को भावपूर्ण बना दिया।

श्री दिगम्बर जैन युवा वर्ग द्वारा आयोजित इस समारोह में परम पूज्य मुनि श्री की पिच्छिका दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी की दीक्षा से संबंधित होने के कारण विशेष श्रद्धा का विषय रही। नई पिच्छिका भेंट करने का सौभाग्य महायज्ञ नायक पदम कुमार–सौरभ कुमार वाझल परिवार को प्राप्त हुआ। पुरानी पिच्छिका चक्रवर्ती राकेश अमरोद परिवार को तथा गंभीर सागरजी महाराज की पुरानी पिच्छिका विपिन सिंघई को प्रदान की गई। नवीन पिच्छिकाएँ ब्रह्मचारी भाई-बहनों द्वारा भेंट की गईं।

इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष राकेश कंसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेन्द्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, विजय धुर्रा, संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय के.टी., संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांश गेला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अनेक समाजसेवियों का सम्मान किया गया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि सब कुछ प्राप्त कर लेने के बाद भी मन में यह भाव बना रहना चाहिए कि अभी और आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि थक जाना जीवन का विराम है, किंतु साधना और आत्मिक उन्नति में थकने का स्थान नहीं है। भीतर की आवाज कभी झूठ नहीं होती, वही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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