
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
खनन क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी चुनौतियों के बीच सुरक्षा, उत्पादन और लागत नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए पारंपरिक ब्लास्टिंग पद्धतियों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक एवं डिजिटल तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है। आधुनिक ब्लास्टिंग न केवल चट्टानों के बेहतर विखंडन में सहायक है, बल्कि खदान से संयंत्र तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और किफायती बनाने में भी मदद कर सकती है।
यह विचार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी के खनन अभियांत्रिकी विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. सुरेश कुमार शर्मा ने माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई), राजस्थान चैप्टर, उदयपुर की ओर से आयोजित तकनीकी व्याख्यान में व्यक्त किए। एमईएआई कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘खनन में नवीन ब्लास्टिंग तकनीक’ रहा।
डॉ. शर्मा ने कहा कि किसी भी खदान में ब्लास्टिंग की गुणवत्ता का प्रभाव केवल विस्फोट तक सीमित नहीं रहता। बेहतर ब्लास्ट डिजाइन से चट्टानों के आकार को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे लोडिंग, परिवहन और पिसाई जैसे अगले चरणों में समय और ऊर्जा की बचत होती है। वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से भू-कंपन, उड़ते पत्थरों, वायु-दाब और आसपास की संरचनाओं को होने वाली अवांछित क्षति को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
व्याख्यान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, वायरलेस प्रज्वलन प्रणाली, एयर-डेक ब्लास्टिंग और परिवर्तनीय ऊर्जा वाले विस्फोटकों के उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. शर्मा ने बताया कि सटीक समय निर्धारण और विस्फोटक ऊर्जा के नियंत्रित उपयोग से बेहतर विखंडन के साथ कंपन को कम करने और कार्यस्थल की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने खदानों की अंतिम दीवारों तथा आबादी और संवेदनशील संरचनाओं के निकट ब्लास्टिंग के लिए प्री-स्प्लिटिंग, स्मूथ ब्लास्टिंग, बफर ब्लास्टिंग और डेक चार्जिंग जैसी तकनीकों को महत्वपूर्ण बताया। भूकंपीय निगरानी, ड्रोन सर्वेक्षण, ड्रिलिंग के दौरान मापन और डिजिटल ब्लास्ट डिजाइन को भी आधुनिक खनन का अहम हिस्सा बताया गया।
डॉ. शर्मा ने भविष्य की ‘क्लोज्ड-लूप ब्लास्टिंग’ प्रणाली की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ड्रिलिंग डेटा, सेंसर, ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय से ब्लास्ट डिजाइन को लगातार अधिक सटीक बनाया जा सकेगा।
कार्यक्रम में चैप्टर अध्यक्ष महेश माथुर ने डॉ. शर्मा का स्वागत किया। उपाध्यक्ष आसिफ एम. अंसारी ने ऐसे तकनीकी आयोजनों को युवा अभियंताओं और खनन क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए उपयोगी बताया। सचिव डॉ. हितांशु कौशल ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया और अंत में आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में एस. एस. राठौड़, आर. आर. चौधरी, डी. डी. श्रीपथ, नवीन ऐरन, एस. के. वशिष्ठ, एन. के. कावड़िया, एस. एल. सुखवाल सहित अनेक वरिष्ठ सदस्य, कार्यकारिणी पदाधिकारी एवं खनन क्षेत्र के पेशेवर उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


