
जयपुर | शाबाश इंडिया।
दशलक्षण महापर्व के अनंत चतुर्दशी के साथ समापन के बाद शनिवार को जयपुर में तप, त्याग और संयम की साधना करने वाले तपस्वियों का सामूहिक पारणा एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। भादों माह में अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने 32 एवं 16 दिनों के षोडशकरण निर्जल उपवास, दशलक्षण पर्व के 10 उपवास, पंचमेरू के 5 उपवास तथा झर एवं रत्नत्रय के तेले सहित विभिन्न कठिन तप-साधनाएं कीं। इन तपस्वियों के सम्मान और सामूहिक पारणा के अवसर पर समाजबंधुओं ने उनके त्याग और साधना की अनुमोदना की।
प्रातः 9 बजे से तपस्वियों के स्वागत एवं सम्मान का क्रम शुरू हुआ। इसके बाद समाज के श्रेष्ठीजनों ने तप श्रेष्ठियों का पारणा करवाया। इस दौरान तपस्वियों के त्याग, तप और संयम की सराहना करते हुए उनके आत्मकल्याण एवं साधना की मंगलकामना की गई।
अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि शनिवार को वरुण पथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः 9:30 बजे दशलक्षण पर्व के दस निर्जल उपवास करने वाली श्रीमती निधि गौरव जैन, पंचमेरू के पांच उपवास करने वाले सर्वेश राकेश जैन तथा तीन दिवसीय झर के तेले करने वाली श्रीमती पूर्णिमा राहुल सेठी, अंकिता नरेश शाह, दीपेश अजमेरा, दीपेश जैन बांदीकुई वाले, आशीष जैन मालपुरा वाले, श्रीमती अनिता जैन बड़जात्या सहित अन्य तपस्वियों के सम्मान में बैंड-बाजों और जयकारों के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने धार्मिक भजनों एवं भक्तिमय धुनों पर जिनेन्द्र भक्ति की। श्रद्धालुओं ने तपस्वियों के त्याग और तप की अनुमोदना करते हुए उनका सम्मान किया तथा उनके आत्मकल्याण की मंगलकामना की।
रविवार को राजधानी जयपुर के 225 से अधिक दिगंबर जैन मंदिरों सहित देश-दुनिया के विभिन्न जैन मंदिरों में सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि दोपहर 3 बजे से मंदिरों में श्रीजी के कलशाभिषेक एवं शांतिधारा के साथ क्षमावाणी पर्व के आयोजन शुरू होंगे। जिन मंदिरों में संत-मुनि एवं माताजी ससंघ विराजमान हैं, वहां श्रद्धालुओं को उनके मंगल आशीर्वचन प्राप्त होंगे। इसके बाद मंदिर समितियों एवं समाजजनों द्वारा सामूहिक रूप से क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि क्षमावाणी पर्व पर समाज का प्रत्येक व्यक्ति वर्षभर में जाने-अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना करेगा और परस्पर क्षमा प्रदान करने का भाव रखेगा। क्षमा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि तथा आपसी प्रेम और सद्भाव का माध्यम है।
अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया कि जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथ तत्त्वार्थसूत्र के नवें अध्याय के छठे सूत्र में आचार्य उमास्वामी ने उत्तम क्षमा सहित दस उत्तम धर्मों का उल्लेख किया है। क्षमावाणी पर्व इन्हीं उत्तम क्षमा भावों को जीवन में धारण करने और आत्मसाधना की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। क्षमा मांगना और क्षमा करना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल, विनम्रता और वीरता का प्रतीक है।
जयपुर के लगभग सभी दिगंबर जैन मंदिरों में क्षमावाणी पर्व के आयोजन होंगे। विशेष रूप से जिन मंदिरों में साधु-साध्वी विराजमान हैं, वहां मुख्य आयोजन के साथ मंगल प्रवचन होंगे। आयोजन के समापन पर खोपरा एवं मिश्री खिलाकर समाजबंधु एक-दूसरे से क्षमायाचना करते हुए क्षमावाणी पर्व मनाएंगे।
रिपोर्ट: अभिषेक जैन बिट्टू, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा एकता संघ


