
पिड़ावा | शाबाश इंडिया।
सकल दिगंबर जैन समाज के आराधना पर्व पर्युषण पर्व का शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा के साथ समापन हुआ। 16 सितंबर से शुरू हुए दस दिवसीय पर्युषण पर्व के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने विभिन्न धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर आत्मकल्याण की आराधना की।
प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि परम पूज्य 108 श्री संस्कार सागर महाराज, क्षुल्लक 105 कमलसागर महाराज एवं क्षुल्लक 105 नैगम सागर महाराज के सानिध्य तथा सपना दीदी के नेतृत्व में अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, सोलह कारण पूजन, पंचमेरू पूजन, दस लक्षण पूजन, मां जिनवाणी पूजन, तत्वार्थ सूत्र वाचन, ध्यान, प्रतिक्रमण, सामायिक, गुरु भक्ति, शंका समाधान और आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दस दिनों तक सुसनेर की दिशा एंड पार्टी द्वारा संगीतमय भक्ति एवं पूजन कराया गया।
शुक्रवार को अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद चौबीस तीर्थंकर भगवान की पूजन की गई। इसके बाद दोपहर में श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा पिपली चौक, शहर मोहल्ला, सेठान मोहल्ला, खांडुपुरा एवं नयापुरा होते हुए वापस बड़ा मंदिर पहुंची। श्रावक सफेद वस्त्र तथा श्राविकाएं केसरिया एवं मंडल की साड़ी पहनकर शोभायात्रा में शामिल हुईं। श्रद्धालु नंगे पैर भगवान की भक्ति करते हुए शोभायात्रा में चल रहे थे।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा। धार्मिक भजनों और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। बड़ा मंदिर पहुंचने के बाद परम पूज्य 108 श्री संस्कार सागर महाराज के प्रवचन हुए। उन्होंने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के साथ पर्युषण पर्व का समापन हो रहा है। ब्रह्मचर्य मनुष्य को अपनी आत्मा में स्थिर रहने और इंद्रियों पर संयम रखने की प्रेरणा देता है। विषय-वासनाओं से दूर रहकर मन, वचन और काया को आत्मकल्याण में लगाना ही ब्रह्मचर्य है। बाहरी आकर्षणों से मन को हटाकर आत्मस्वरूप की ओर बढ़ना ही इस धर्म का वास्तविक उद्देश्य है।
शाम को गुरु भक्ति, सामायिक, बड़ा प्रतिक्रमण एवं शंका समाधान का आयोजन हुआ। इसके बाद श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान पार्श्वनाथ एवं पंच परमेष्ठी भगवान की संगीतमय महाआरती की।
रविवार को सकल जैन समाज की ओर से मुनि संघ के सानिध्य में सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर बेला, तीन, पांच एवं दस उपवास करने वाले तपस्वियों तथा रत्नत्रय की शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।
इधर खंडपुर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन जुना मंदिर में भी शैलनी दीदी एवं मुस्कान दीदी के नेतृत्व में दस लक्षण धर्म के तहत दस दिनों तक विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रावक-श्राविकाओं ने उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम शौच, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य एवं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की। इस दौरान अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
जुना मंदिर में गुरुवार रात जैन म्यूजिकल हाउजी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार नीति जैन को आटा चक्की, द्वितीय पुरस्कार आदि जैन को मिक्सर तथा तृतीय पुरस्कार ऐना जैन को गैस चूल्हा प्रदान किया गया।
दस दिनों तक चले धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर धर्मलाभ एवं पुण्यलाभ अर्जित किया।
रिपोर्ट: सौरभ जैन


