Saturday, September 19, 2026

उत्तम आर्जव रीति बखानी, रंचक दगा बहुत दुखदानी

जयपुर | शाबाश इंडिया।

दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के चल रहे दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत शुक्रवार, 18 सितम्बर को वीतराग धर्म के लक्षण उत्तम आर्जव की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। इस अवसर पर निर्दोष सप्तमी भी मनाई गई। शहर के विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में प्रातः विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं शांतिधारा के आयोजन हुए, वहीं सायंकाल महाआरती के बाद ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राजस्थान जैन युवा महासभा के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि दिगम्बर जैन मंदिरों में प्रातः श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद दशलक्षण धर्म की विधान मंडल पर अष्ट द्रव्य से पूजा-अर्चना की गई। संतों एवं विद्वानों ने उत्तम आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए सरलता, निष्कपटता और सत्य आचरण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सरल स्वभाव वाला होना चाहिए। मन में जो भाव हों, वही वाणी में व्यक्त करने चाहिए और कथनी-करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। किसी के प्रति छल-कपट अथवा दगा रखने की भावना नहीं होनी चाहिए।

मंदिरों में पूजा के दौरान उत्तम आर्जव धर्म की संगीतमय पूजा भी की गई। विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि शनिवार, 19 सितम्बर को वीतराग धर्म का उत्तम शौच लक्षण मनाया जाएगा।

शांतिनाथ जी की खोह स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र में समाजश्रेष्ठी कमल वैद के नेतृत्व में दशलक्षण पूजा की गई। इससे पूर्व स्वर्ण कलशों से करीब 1000 वर्ष प्राचीन भगवान आदिनाथ का अभिषेक किया गया। श्योपुर स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में अमिता शाह एवं दिव्या बाकलीवाल के नेतृत्व में महिलाओं ने दशलक्षण महापर्व की पूजा-अर्चना की।

तारों की कूंट स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अध्यक्ष नवीन जैन एवं मंत्री धनेश सेठी के नेतृत्व में दशलक्षण महापर्व मनाया गया। प्रातः अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद उत्तम आर्जव धर्म की पूजा की गई। सायंकाल महाआरती के बाद प्रकाश जैन शास्त्री ने प्रवचन दिए। शनिवार को अभिषेक, शांतिधारा एवं दशलक्षण विधान पूजा के बाद सायंकाल महाआरती और पं. प्रकाश जैन शास्त्री के प्रवचन होंगे। इसके बाद शाम 7:30 बजे से भक्तामर स्तोत्र दीप महाअर्चना अनुष्ठान का संगीतमय आयोजन किया जाएगा। समाजश्रेष्ठी लता, पवन एवं अर्हम सेठी मुख्य दीप प्रज्वलनकर्ता होंगे।

सांगानेर थाना सर्किल स्थित चित्रकूट कॉलोनी के श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य विशद सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में उत्तम आर्जव लक्षण की सामूहिक पूजा की गई। अध्यक्ष अनिल जैन काशीपुरा एवं महामंत्री मूलचंद पाटनी ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य श्री ने उत्तम आर्जव धर्म पर मंगल प्रवचन दिए।

मानसरोवर के मीरामार्ग स्थित आदिनाथ भवन में मुनि विलोक सागर एवं मुनि विबोध सागर महाराज के सानिध्य में उत्तम आर्जव धर्म मनाया गया। उपाध्यक्ष जम्बू सोगानी ने बताया कि धर्मसभा में मुनिश्री ने उत्तम आर्जव धर्म का महत्व समझाया। सायंकाल महाआरती के बाद ज्ञानवर्धक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

आगरा रोड स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र चूलगिरी में भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद विजय सोगानी के निर्देशन में दशलक्षण महापर्व की संगीतमय सामूहिक पूजा की गई।

शुक्रवार को दिगम्बर जैन मंदिरों में निर्दोष सप्तमी भी मनाई गई। इस अवसर पर व्रत-उपवास की विशेष पूजा कराई गई और श्रद्धालुओं ने व्रत कथा का श्रवण किया। अनेक श्रद्धालुओं ने संयम, तप एवं त्याग के साथ निराहार रहकर उपवास किया।

सायंकाल मंदिरों में महाआरती के बाद विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। चित्रकूट कॉलोनी सांगानेर जैन मंदिर में ‘सवाल हमारे, जवाब आपके’, मानसरोवर मीरामार्ग स्थित आदिनाथ भवन में ‘एक शाम आदिनाथ बाबा के नाम’ भक्ति संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें गायक नरेंद्र जैन ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। कीर्ति नगर में ‘भक्ति से मुक्ति’ धार्मिक अंताक्षरी, मधुवन टोंक फाटक में जैन गीत माला, वरुण पथ मानसरोवर में विराट कवि सम्मेलन, जनकपुरी में ‘धर्म की गंगा’, जनता कॉलोनी में ‘अपनी टोपी उसके सिर’ एवं पार्सल गेम, जवाहर नगर में ‘संस्कृति और संस्कार’ बाल वेशभूषा प्रतियोगिता, दुर्गापुरा में वर्तमान स्तोत्र, सिद्धार्थ नगर में ‘कौन बनेगा केवल ज्ञानी’ तथा जौहरी बाजार के दिगम्बर जैन मंदिर चाकसू में भजन संध्या आयोजित की गई।

विनोद जैन ‘कोटखावदा’ के मुताबिक सोमवार, 21 सितम्बर को जैन धर्मावलंबियों द्वारा सुगंध दशमी मनाई जाएगी। इस दिन सायंकाल अष्ट कर्मों के नाश की भावना से मंदिरों में श्रद्धालु अग्नि में धूप अर्पित करेंगे। साथ ही ज्ञानवर्धक एवं संदेशात्मक झांकियां सजाई जाएंगी।

उन्होंने बताया कि 23 से 25 सितम्बर तक तीन दिवसीय कर्म निर्झरा तेला तथा 24 से 26 सितम्बर तक तीन दिवसीय रत्नत्रय व्रत एवं तेला किया जाएगा। 25 सितम्बर को अनंत चतुर्दशी एवं दशलक्षण समापन कलश होंगे। रविवार, 27 सितम्बर को षोडशकारण समापन कलश एवं पड़वा ढोक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान दिगम्बर जैन मंदिरों में पूजा-अर्चना के विशेष आयोजन होंगे।

विनोद जैन ‘कोटखावदा’
प्रदेश महामंत्री

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