
इंदौर | शाबाश इंडिया।
अंजनी नगर स्थित श्री चंद्र प्रभु मांगलिक भवन में पूज्य आचार्य श्री कुमुदनंदीजी महाराज का 63वां अवतरण दिवस श्रद्धा, भव्यता एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन में शहर में पहली बार पांच संघों के साधु-साध्वियां एक मंच पर विराजित हुए, जिसे श्रद्धालुओं ने विशेष धर्मप्रभावना का अवसर बताया।
दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आचार्य श्री विप्रणत सागरजी महाराज गुमास्ता नगर, मुनि श्री साध्यसागरजी महाराज 20 पंथी मंदिर मल्हारगंज, मुनि श्री आचरणसागरजी महाराज स्मृति नगर तथा आचार्य सिद्धांत सागरजी महाराज के संघ से आर्यिका माताजी एवं क्षुल्लकजी सुदामा नगर से विहार कर कालानी नगर चौराहे पहुंचे। यहां सभी संतों का आपस में वात्सल्यपूर्ण मिलन हुआ। इस दृश्य को देखकर अनेक श्रावक भावुक हो गए।
कालानी नगर चौराहे से सभी संत श्री चंद्र प्रभु मांगलिक भवन पहुंचे। मार्ग में श्रद्धालुओं ने संतों की आरती उतारी तथा पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम का आयोजन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पंचायती ट्रस्ट, अंजनी नगर एवं दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
श्रीमती अनिता जैन एवं मेघा जैन के मंगलाचरण के पश्चात आचार्य श्री कुंथुसागरजी महाराज के चित्र के समक्ष कैलाश वेद, देवेंद्र सोगानी, कमलेश कासलीवाल, जैनेश झांझरी, पिंकेश टोंग्या, सतीश जैन, वीरेंद्र बढ़जात्या, पवन पाटोदी सहित समाजजनों ने दीप प्रज्वलित किया।
पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सोनीपत से पधारे विनोदजी-सरिताजी जैन परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं 63 श्रद्धालुओं द्वारा आचार्य श्री कुमुदनंदीजी महाराज को 63 शास्त्र भेंट किए गए। सभी साधु-साध्वियों ने आचार्यश्री को विनयांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर आचार्य श्री विप्रणत सागरजी महाराज ने कहा कि भगवान का जन्म कल्याणक मनाया जाता है, जबकि संसारी प्राणी की मृत्यु होती है। उन्होंने धर्म और साधना के महत्व पर प्रकाश डाला।
आचार्य श्री कुमुदनंदीजी महाराज ने कहा कि एक मंच पर पांच संघों के साधु-साध्वियों का विराजना अपने आप में बड़ी धर्मप्रभावना है। उन्होंने कहा कि पहले साधु एक मंच पर एकत्र हों, उसके बाद समाज से एकता का आह्वान करना चाहिए। उन्होंने श्री देवेंद्र सोगानी के नेतृत्व में अंजनी नगर कमेटी द्वारा किए गए आयोजन की सराहना करते हुए सभी को आशीर्वाद दिया।
गुरुदेव ने कहा कि धन से पुस्तकें खरीदी जा सकती हैं, लेकिन विद्या नहीं; मंदिर-मस्जिद बनाए जा सकते हैं, लेकिन धर्म नहीं; यश प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन विजय नहीं और भोग प्राप्त हो सकता है, लेकिन मोक्ष नहीं। उन्होंने कहा कि सभी लोग उनके अवतरण दिवस के लिए नहीं, बल्कि धर्मप्रभावना के लिए एकत्रित हुए हैं।
कार्यक्रम में समाज श्रेष्ठी अशोक टोंग्या, प्रदीप बढ़जात्या, दिलीप लुहाड़िया, चंद्र कुमार गोधा, अक्षय काला, हेमंत गदिया, कमल रावका सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
धर्मसभा का सफल संचालन पंडित योगेंद्र काला ने किया, जबकि आभार ऋषभ पाटनी ने व्यक्त किया।
रिपोर्ट: सतीश जैन (इला बैंक)
प्रचार प्रमुख, दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर


