
सीकर | शाबाश इंडिया।
धर्म नगरी सीकर में मंगलवार को आध्यात्मिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। 20वीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री 108 शांति सागर जी महाराज की मूल अक्षुण्ण पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाचार्य, राष्ट्र गौरव वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (37 पिच्छिका विशाल संघ) के सानिध्य में 58वें धर्म वात्सल्य वर्षायोग (चातुर्मास) का शुभारंभ चातुर्मास कलश स्थापना के साथ विधि-विधान, अपार जनसमूह और भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। लगभग 39 वर्षों बाद गुरु की समाधि भूमि पर आयोजित यह चातुर्मास जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक अवसर बन गया।
जैन समाज के प्रवक्ता विवेक पाटोदी ने बताया कि वर्ष 1986 में आचार्य वर्धमान सागर महाराज अपने दीक्षा गुरु आचार्य धर्मसागर महाराज के साथ सीकर पधारे थे। वर्ष 1987 में इसी पावन भूमि पर आचार्य धर्मसागर महाराज ने समाधि धारण की थी। अब लगभग चार दशक बाद उनके पट्टशिष्य आचार्य वर्धमान सागर महाराज का उसी समाधि स्थल पर चातुर्मास होना गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत संगम है।
मुख्य चातुर्मास स्थल पार्श्वनाथ भवन में ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। ध्वजारोहण का सौभाग्य झूमरमल पन्नालाल गंगवाल परिवार, गुवाहाटी को प्राप्त हुआ। इसके बाद मंडप उद्घाटन सुमत प्रकाश, विमल कुमार, रोहित कुमार एवं अमित कुमार मोदी परिवार, सीकर द्वारा सम्पन्न किया गया। दिल्ली से पधारी डॉ. इंदु जैन ने प्राकृत भाषा में सरस्वती आराधना प्रस्तुत की। मंच संचालन नीतू पाटोदी एवं पदम सेठी ने किया।
आचार्य धर्मसागर सभागार में मंत्रोच्चारण के बीच चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना की गई। प्रथम कलश का सौभाग्य कमला देवी, पदमचंद, महेंद्र कुमार एवं समस्त धाकड़ा परिवार (सीकर, चेन्नई, बेंगलुरु) को तथा द्वितीय कलश का सौभाग्य पवन कुमार, सुमित कुमार एवं सन्नी मोदी परिवार (कोलकाता) को प्राप्त हुआ। चातुर्मास के वात्सल्य भोजन का पुण्यार्जन मोदी परिवार (सीकर, जयपुर, सूरत एवं कोलकाता) को मिला। मंगलाचरण जैन सोशल ग्रुप एवं श्री दिगम्बर जैन महिला महासमिति द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा जोबनेर की तारा दादी ने भजन प्रस्तुत किए।
समस्त मांगलिक क्रियाएं पारसोला से पधारे विधानाचार्य कीर्तिश जी के निर्देशन में सम्पन्न हुईं, जबकि विधानाचार्य आशीष जैन शास्त्री ने सहयोग किया। संगीत प्रस्तुति नरेंद्र जैन एवं उनकी टीम, जयपुर ने दी।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल साधु की स्थिरता का काल नहीं, बल्कि श्रावकों के लिए आत्मचिंतन, संयम और साधना का सर्वोत्तम अवसर है। प्राकृतिक वर्षा तन को शीतल करती है, जबकि वर्षायोग की धर्मवर्षा आत्मा के जन्म-जन्मांतर के संताप और विकारों को शांत कर देती है। धर्म की अमृतवाणी आत्मा की प्यास बुझाकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है।
चातुर्मास समिति के अनुसार चार माह तक प्रतिदिन प्रातः जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक, वृहद शांतिधारा, नियमित पूजन, आचार्य श्री के मंगल प्रवचन, आहारचर्या, सामूहिक स्वाध्याय, सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम, गुरु भक्ति एवं महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
समारोह में सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर, पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष पवन मोदी, डॉ. कमल सिखवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इसके अलावा कोलकाता, सूरत, दिल्ली, जयपुर, उदयपुर, टीकमगढ़, खंडवा, किशनगढ़, इलाहाबाद, बेंगलुरु, गुवाहाटी, धरियाबाद, निवाई, डिमापुर सहित देशभर से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु एवं प्रवासी समाजजन समारोह में शामिल हुए।


