
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
चित्रकूट नगर स्थित पेसिफिक कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय ‘स्टेज टू स्क्रीन’ कार्यशाला विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों के लिए अभिनय, मंच संचालन तथा फिल्म निर्माण की रचनात्मक प्रक्रिया को समझने का प्रभावी माध्यम बनी। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए मंच से लेकर कैमरे के सामने प्रस्तुति देने तक के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।
कार्यशाला के पहले दिन युवा एंकर, एक्टर एवं एंटरटेनर दीपक शर्मा ने प्रतिभागियों को मंच संचालन, अभिनय तथा दर्शकों से संवाद स्थापित करने की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने प्रभावशाली एंकरिंग के लिए आवाज के उतार-चढ़ाव, शब्दों के स्पष्ट उच्चारण, आत्मविश्वास, हाव-भाव, मंच उपस्थिति और सही समय पर प्रतिक्रिया देने के महत्व को समझाया।
दीपक शर्मा ने कहा कि एक सफल एंकर या कलाकार के लिए केवल संवाद बोलना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विषय की समझ, सहजता और दर्शकों की मनःस्थिति को पहचानना भी आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों और अभिनय अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों की झिझक दूर की। इस दौरान अनुज सिंह ने सहयोगी के रूप में भूमिका निभाई।
कार्यशाला के दूसरे दिन फिल्म मेकर, राइटर एवं डायरेक्टर सुबस्तो दक्ष पांडे ने फिल्म निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विचार को कहानी में बदलने, पटकथा लेखन, चरित्र निर्माण, संवाद, दृश्य संयोजन, कैमरा एंगल, शॉट डिवीजन और निर्देशन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया।
उन्होंने बताया कि फिल्म निर्माण तकनीक और रचनात्मकता का ऐसा समन्वय है, जिसमें कहानी, अभिनय, कैमरा, ध्वनि और संपादन मिलकर प्रभावी दृश्य अभिव्यक्ति का निर्माण करते हैं।
कार्यशाला सहयोगी दीपेंद्र कुमावत ने स्टेज और स्क्रीन अभिनय के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि मंच पर कलाकार को आवाज और भाव-भंगिमाओं का व्यापक प्रयोग करना पड़ता है, जबकि कैमरे के सामने सूक्ष्म हाव-भाव अधिक प्रभावशाली होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को मौलिक विचारों पर कार्य करने और नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित किया।
पेसिफिक कॉलेज के चेयरपर्सन आशीष अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा को नई पहचान देने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास और संचार कौशल को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी इसी उत्साह और समर्पण के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दीं।
डायरेक्टर डॉ. रिमझिम गुप्ता ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यशाला ने विद्यार्थियों को मनोरंजन एवं फिल्म जगत की कार्यप्रणाली समझने के साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का उपयोगी मंच प्रदान किया।
रिपोर्ट : राकेश शर्मा ‘राजदीप’ | फोटो : दिव्या लावटी


