
जयपुर | शाबाश इंडिया।
अजमेर रोड स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, धावास में विराजमान राष्ट्रसंत आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज की सुयोग्य शिष्या आर्यिका सुविज्ञमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान में श्रद्धालुओं की आस्था एवं भक्ति का महासागर उमड़ रहा है।
मंदिर समिति के संरक्षक एवं निर्माण संयोजक जय कुमार जैन-बड़जात्या ने बताया कि विधान के अंतर्गत शुक्रवार को सौधर्म इन्द्र, कुबेर इन्द्र, मैना सुंदरी-श्रीपाल एवं यज्ञ नायक के नेतृत्व में श्रद्धालुओं द्वारा 64 अर्घ्य समर्पित किए गए।
मंदिर समिति अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बैद ने बताया कि बाल ब्रह्मचारिणी श्रेया दीदी एवं प्रतिष्ठाचार्य अक्षय भैया ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए भक्ति, नमोकार मंत्र और आत्मकल्याण का महत्व बताया।
प्रतिष्ठाचार्य अक्षय भैया ने कहा कि “जहाँ णमोकार होता है, वहाँ अहंकार नहीं होता। णमोकार का जाप करने वाला व्यक्ति अहंकारी नहीं बनता। अहंकार सदैव पतन की ओर ले जाता है।”
बाल ब्रह्मचारिणी श्रेया दीदी ने कहा कि सिद्धों की आराधना श्रावक को सिद्धत्व की दिशा में अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि भगवान की सच्ची भक्ति पापों का क्षय करती है, अशुभ कर्मों का नाश करती है तथा चंदनबाला और मीरा जैसी निष्काम भक्ति ही जीवन को सार्थक बनाती है।
मंत्री मितेश ठोलिया ने बताया कि सायंकाल श्री सन्मति सुनीलम् महिला मण्डल के निर्देशन में सिद्धचक्र महामण्डल विधान पर आधारित धार्मिक अंताक्षरी का ज्ञानवर्धक एवं रोचक आयोजन किया गया।
महिला मण्डल की प्रचार मंत्री रीता जैन ने बताया कि सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य विकास पाटोदी परिवार, यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य हैमेन्द्र लुहाड़िया परिवार, कुबेर इन्द्र बनने का सौभाग्य जय कुमार जैन-बड़जात्या परिवार तथा मैना सुंदरी-श्रीपाल बनने का सौभाग्य अल्पना ठोलिया परिवार को प्राप्त हुआ।
सह मंत्री नरेन्द्र गोधा एवं मनोज जैन-पचेवर ने बताया कि प्रतिदिन सायंकाल महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक ज्ञानवर्धक एवं जीवनोपयोगी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, जिससे धर्म के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दिया जा सके।


