Wednesday, September 9, 2026

गुरु मां बिन्धश्री माताजी के सानिध्य में प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला का समापन

घुवारा | शाबाश इंडिया।

गणिनी आर्यिका श्री 105 बिन्धश्री माताजी के सानिध्य में आयोजित प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला का समापन धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिवस 1650 वर्ष प्राचीन अतिशयकारी शांतिनाथ भगवान के मंदिर में नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ आयोजन की शुरुआत हुई। अंतिम सत्र में श्री विहार, वस्त्र उत्सव एवं निर्वाण भक्ति सहित विभिन्न धार्मिक विधियों पर प्राचीन शास्त्रों के आधार पर गहन मंथन किया गया।

कार्यशाला के दौरान प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन में विभिन्न धार्मिक विधियों के प्रमाण प्राप्त हुए, वहीं कुछ विधियों के कालांतर में लुप्त होने की जानकारी भी सामने आई। विद्वानों ने बताया कि आचार्य नेमीचंद्र सिद्धांत चक्रवर्ती द्वारा निर्वाण कल्याणक की विधि का उल्लेख मिलता है। दक्षिण भारत से प्राप्त नौवीं शताब्दी के ताड़पत्रों पर लिखित सामग्री, जिसमें प्राचीन कन्नड़ एवं संस्कृत का प्रयोग हुआ है, पर वर्तमान में शोध कार्य चल रहा है।

समापन अवसर पर परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 बिन्धश्री माताजी ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में प्रचलित कुरीतियों एवं गलत परंपराओं पर से पर्दा हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए। उन्होंने इसे विशेष उपलब्धि बताते हुए कहा कि जिन विद्वानों को एक साथ आमंत्रित करने में लाखों रुपये खर्च होते हैं, उनका इतनी बड़ी संख्या में सहज रूप से ज्ञान-कुंभ में एकत्र होकर मंथन करना अतिशय से कम नहीं है।

कार्यशाला में देशभर से करीब 200 विद्वानों ने सहभागिता की। पंडित भागचंद जी धरियाबाद, ब्रह्मचारी शोभित भैया जी मदवाड़ा, मुकेश जी विनम्र, ब्रह्मचारी आशीष भैया ‘पुण्यांश’ भोपाल, संदीप उपाध्ये संभाजीनगर, अनिल जी अकोला, विनोद पगारिया, नितिन जी देंदू, शैलेश जी मंगीटुंगी सहित अनेक विद्वानों को ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। अन्य विद्वानों को ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि प्रशिक्षु’ की उपाधि से सुशोभित किया गया।

उपस्थित विद्वानों ने पंडित महेश जी कारीटोरन/दिमापुर को ‘पंडित चक्रवर्ती’ की उपाधि प्रदान किए जाने का समर्थन किया। इस संबंध में सभी ने हस्ताक्षर कर प्रस्ताव तैयार किया, जिसे आचार्य विशुद्ध सागर जी के चरणों में होने वाली आगामी कार्यशाला में प्रस्तुत किया जाएगा।

कार्यशाला के मुख्य बिंब प्रतिष्ठाचार्य अखिलेश जी शास्त्री रमगड़ा एवं नवोदित प्रतिष्ठाचार्य आयुष जी मोतीवाला, जबलपुर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनका सम्मान किया गया। कुलपति महेंद्र पंडित जी मुरैना एवं संयोजक अरुण भैया जी ‘शुद्धश’ भोपाल का भी सम्मान किया गया।

इस अवसर पर आगामी 30 सितंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन का आमंत्रण पत्र परम पूज्य गुरु मां को भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। सम्मेलन के बुंदेलखंड क्षेत्र प्रभारी एवं पत्रकार भरत सेठ घुवारा ने देशभर से आए विद्वानों, संपादकों, लेखकों तथा मीडिया एवं सोशल मीडिया से जुड़े प्रतिनिधियों सहित बुंदेलखंड क्षेत्र के जैन पत्रकारों को रायपुर में आयोजित सम्मेलन में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

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