
जयपुर | शाबाश इंडिया।
97वें वर्ष में प्रवेश कर रहे वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी एवं जनचिंतक प्रवीण चंद्र छाबड़ा का जीवन कर्म, सादगी, विनम्रता और जनसेवा का प्रेरक उदाहरण है। 25 जुलाई 2026 को उनका जन्मदिवस केवल एक व्यक्ति का जन्मोत्सव नहीं, बल्कि पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके आजीवन समर्पण का उत्सव है।

प्रवीण चंद्र छाबड़ा ने अपने व्यक्तित्व में जैन दर्शन की अहिंसा, सादगी, निर्लिप्तता और सबको साथ लेकर चलने की भावना को आत्मसात किया। लगभग आठ दशकों से अधिक समय तक उन्होंने पत्रकारिता और सामाजिक जीवन में निष्पक्षता, ईमानदारी और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
बाल्यकाल से ही उनमें नेतृत्व और सृजनशीलता के गुण स्पष्ट दिखाई देते थे। मात्र 12 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने साथियों के साथ ‘शिशु क्लब’ की स्थापना की तथा हस्तलिखित समाचार-पत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया। यही प्रयास आगे चलकर उनके सफल पत्रकारिता जीवन की मजबूत नींव बना।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में पले-बढ़े प्रवीण चंद्र छाबड़ा स्वतंत्र भारत की पहली सुबह के साक्षी रहे। राजस्थान विधानसभा के प्रथम सत्र की रिपोर्टिंग से लेकर अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज तक पहुँचाया। उनकी पत्रकारिता सदैव तथ्यों, निष्पक्षता और जनहित पर आधारित रही।
पत्रकारिता को उन्होंने केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम माना। पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा, प्रेस क्लब की स्थापना, पत्रकार आवास योजना और श्रमजीवी पत्रकारों के सम्मान के लिए उनके योगदान को आज भी पत्रकार जगत आदरपूर्वक याद करता है। इसी स्नेह और सम्मान के कारण वे पत्रकार बिरादरी में “भाईसाहब” के नाम से विख्यात हैं।
उनका संपूर्ण जीवन नई पीढ़ी के लिए यह संदेश देता है कि सत्यनिष्ठा, सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण ही किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होते हैं। प्रवीण चंद्र छाबड़ा का व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।


