इंदौर/शाबाश इंडिया।

आचार्य 108 श्री सुनील सागर जी महाराज ससंघ के परम सान्निध्य में आयोजित त्रिदिवसीय संगोष्ठी “कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा” के तृतीय सत्र का शुभारंभ सोमवार को श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के तृतीय सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. नलिन के. शास्त्री, नई दिल्ली ने प्राकृत भाषा के महत्व एवं उसकी समृद्ध परंपरा पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी महाराज, मुनि श्री संबुद्धि सागर जी, आचार्य विप्रणीत सागर महाराज सहित आचार्य श्री संघ एवं आर्यिका संघ का सान्निध्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर हाटपिपल्या से आए भैया जी का केशलोंच भी संपन्न हुआ।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना में कहा कि “प्राकृत प्रकृति की भाषा है। इसे आम बोलचाल, लेखन और व्यवहार में लाने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।”
आचार्य श्री ने कहा कि जैन धर्म जन-जन का धर्म है। यह संस्कृति, सभ्यता, सेवा, परोपकार, जीवदया और अहिंसा का संवाहक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धा एवं आस्था रखते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
आचार्य श्री की मंगल देशना से पूर्व अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं चित्र अनावरण किया गया। मंगलाचरण रश्मि जैन, जबलपुर ने प्रस्तुत किया। मांगलिक पाद प्रक्षालन का सौभाग्य आजाद जैन एवं अमित जैन बीड़ी वाला परिवार को प्राप्त हुआ। मांगलिक शास्त्र भेंट मुकेश पाटोदी परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन हसमुख गांधी ने किया। इस अवसर पर पार्षद पंखुड़ी जैन ने आचार्य श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
संगोष्ठी में विभिन्न संस्थानों की अकादमिक सहभागिता
इस संगोष्ठी में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, एकलव्य विश्वविद्यालय दमोह, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश), एस.ए. विश्वविद्यालय नवादा (बिहार), श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान इंदौर तथा बाहुबली प्राकृत विद्यापीठ, श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) का अकादमिक सहयोग रहा।
प्राकृत नाटिका ने बांधा समां
कार्यक्रम में “पागदं पगिदि-भासा” नामक प्राकृत नाटिका का मंचन किया गया, जिसमें सोनाली जैन, सीमा काला, अपूर्वा जैन एवं सविता जैन ने प्रभावी प्रस्तुति दी। कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ की शोध छात्रा कुमारी श्रिया अग्रवाल ने भू-वलय एवं प्राकृत भाषा पर अपना अभिमत प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट के अमित कासलीवाल, नेमिनगर से इंद्र सेठी, सुशील कासलीवाल, आदित्य कासलीवाल, लोकेश कासलीवाल, ब्रह्मचारी अनिल कुमार जैन, ब्रह्मचारी सुनील भैया, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन से मनोहर झांझरी, टी.के. वेद, प्रदीप चौधरी, दिगंबर जैन श्राविकाश्रम समवशरण मंदिर ट्रस्ट की अध्यक्ष पुष्पा कासलीवाल, शरद सेठी, दिगंबर जैन तुकोगंज जैन समाज के अध्यक्ष सुमत लुहाड़िया, हसमुख गांधी, कीर्ति पांड्या, रीतेश पाटनी, ऋषभ कुमार जैन, संजय पापड़ीवाल, रेखा संजय जैन सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।


