
जयपुर | शाबाश इंडिया।
जैन धर्मावलंबियों ने बुधवार को चन्दन षष्ठी (चांदन छठ) पर्व श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया। गत वर्ष अशुद्धि के माध्यम से हुए पाप बंध के निवारण एवं प्रायश्चित की भावना से जैन महिलाओं सहित श्रावक-श्राविकाओं ने चन्दन षष्ठी व्रत किया। इस अवसर पर जयपुर शहर के 225 से अधिक दिगम्बर जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, व्रत कथा वाचन एवं धार्मिक आयोजन हुए।
राजस्थान जैन सभा जयपुर के उपाध्यक्ष विनोद जैन ‘कोटखावदा’ के मुताबिक चन्दन षष्ठी के अवसर पर अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास तथा कई श्रद्धालुओं ने एकासन का व्रत किया। पं. प्रद्युम्न जैन शास्त्री ने बताया कि एक वर्ष के दौरान स्वयं द्वारा अशुद्धि के माध्यम से हुए पाप बंध के निराकरण के लिए चन्दन षष्ठी व्रत किया जाता है। यह व्रत भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को आता है तथा आठ वर्ष से अधिक आयु के परिवार के प्रत्येक सदस्य द्वारा श्रद्धानुसार किया जाता है।
चन्दन षष्ठी व्रत के अवसर पर दिगम्बर जैन मंदिरों में छह प्रकार की विशेष पूजाएं की गईं। इनमें समुच्चय पूजा अथवा नवदेवता पूजा, चौबीस तीर्थंकर भगवान की पूजा, मूलनायक भगवान की पूजा, भगवान चंद्रप्रभु की पूजा, भगवान नेमिनाथ की पूजा तथा भगवान महावीर स्वामी की पूजा शामिल रही। जिन मंदिरों में इन तीन तीर्थंकरों में से कोई मूलनायक भगवान हैं, वहां सिद्ध भगवान की पूजा भी की गई।
पूजा के पश्चात चन्दन षष्ठी व्रत के जाप किए गए। णमोकार महामंत्र की एक माला के बाद ‘ॐ ह्रीं अनंतानंत श्री परम सिद्धेभ्यो नमो नमः’ की एक माला, ‘ॐ ह्रीं अर्हम् श्री चंद्रप्रभ जिनेंद्राय नमः’ की एक माला तथा ‘ॐ ह्रीं अर्हम् श्री अरिष्ट नेमिनाथ जिनेंद्राय नमः’ की एक माला का जाप किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे दिन धर्म आराधना में बिताकर व्रत एवं पूजा-अर्चना के माध्यम से धार्मिक लाभ अर्जित किया।
विनोद जैन के मुताबिक अपवित्र अवस्था में किसी मुनिराज को आहार देने, मंदिर की किसी वस्तु को छूने अथवा रजस्वला अवस्था में मायाचारी पूर्वक धर्मलाभ के लोभ से कोई धार्मिक क्रिया करने आदि से हुए पापों के प्रायश्चित की भावना से जैन श्रद्धालु चन्दन षष्ठी व्रत करते हैं। इस दौरान महिलाओं ने चन्दन षष्ठी व्रत की कथा का श्रवण भी किया।
तारों की कूट स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में दीपिका जैन कोटखावदा के नेतृत्व में अष्ट द्रव्य से चन्दन षष्ठी व्रत की विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धाभाव से अर्घ्य चढ़ाए गए। इस अवसर पर दीपिका जैन कोटखावदा, नीरु छाबड़ा, प्रमिला पाटनी, मृदुला सरणका, सीमा बाकलीवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। पूजा के समापन पर चन्दन षष्ठी व्रत के जाप किए गए और आरती के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान चन्दन षष्ठी व्रत कथा का वाचन भी किया गया।
राजस्थान जैन सभा जयपुर के उपाध्यक्ष विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि गुरुवार को जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर दिगम्बर जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक आयोजन होंगे।
उन्होंने बताया कि 11 से 13 सितम्बर तक लब्धिविधान तेला, 13 सितम्बर को रोट तीज एवं चौबीसी व्रत मनाया जाएगा। इसके बाद 15 से 25 सितम्बर तक दशलक्षण महापर्व आयोजित होगा। इस दौरान शहर के दिगम्बर जैन मंदिरों में पूजा-पाठ एवं विभिन्न धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी।
दशलक्षण महापर्व के दौरान उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम शौच, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन एवं उत्तम ब्रह्मचर्य—इन दस धर्मों की आराधना की जाएगी। दस दिनों के दौरान प्रातःकाल जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, सामूहिक पूजा, मुनिराजों की विशेष प्रवचन श्रृंखला, श्रावक संस्कार साधना शिविर, महाआरती तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। धर्मावलंबी अपनी क्षमता एवं श्रद्धानुसार तीन, पांच, आठ, दस, सोलह, बत्तीस दिन सहित अलग-अलग अवधि के उपवास करते हैं।


