
घुवारा | शाबाश इंडिया।
जैन धर्म के इतिहास में ज्ञान एवं शोध का एक अनूठा आयोजन होने जा रहा है। जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में 3 से 9 सितंबर 2026 तक ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला’ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य प्राचीन प्रतिष्ठा विधियों का गहन शोध एवं अध्ययन कर समाज को आगम सम्मत एवं प्रमाणिक प्रतिष्ठा विधि उपलब्ध कराना है।
भारतवर्षीय दिगंबर जैन आगम मार्गी विद्वत समिति के तत्वावधान एवं श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन के आयोजकत्व में होने वाली इस कार्यशाला के मुख्य संचालक प्रतिष्ठाचार्य पं. महेश कुमार जी डीमापुर हैं। पं. महेश कुमार जी को देशभर में 70 से अधिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठाएं कराने का अनुभव बताया गया है। वे प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ के संग्रहकर्ता, ‘भाग्योदय एस्टो ऐप’ के निर्माता तथा वर्तमान पंचांग के प्रथम गणितकर्ता के रूप में भी परिचित हैं। बुंदेलखंड में धातु का सहस्रकूट जिनालय निर्माण तथा कारीटोरन अतिशय क्षेत्र को विश्व पटल पर पहचान दिलाने में भी उनकी भूमिका बताई गई है।
आयोजकों के अनुसार कार्यशाला में उत्तर एवं दक्षिण भारत सहित देशभर के 300 से अधिक विद्वान एवं प्रतिष्ठाचार्य सन्निधि प्रदान करेंगे। इस दौरान ऐसा प्रतिष्ठा ग्रंथ तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जिसमें प्रतिष्ठा से संबंधित प्रत्येक क्रिया को प्रमाण एवं विधिवत लिपिबद्ध किया जाएगा।
कार्यशाला के दौरान करीब 20 हस्तलिखित ताड़पत्रीय तथा 21 प्रकाशित ग्रंथों सहित पूर्वाचार्यों एवं विद्वानों द्वारा प्रणीत साहित्य का गहन शोधपरक अध्ययन किया जाएगा। आयोजकों के मुताबिक लगभग पांचवीं से 13वीं शताब्दी तक के अप्रकाशित एवं प्राचीन ग्रंथों में उपलब्ध प्रतिष्ठा विधियों का अध्ययन एवं परिमार्जन कर ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ’ के रूप में संकलित करने का प्रयास किया जा रहा है। समिति की भावना है कि अप्रकाशित प्रतिष्ठा ग्रंथों का विधिवत प्रकाशन हो और उनकी ज्ञान परंपरा सुरक्षित रहे।
आयोजन के दौरान अतिशय क्षेत्र के प्रांगण में एक विशाल शिलालेख भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें इस ऐतिहासिक कार्यशाला की गाथा को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने का प्रयास होगा। कार्यशाला के पश्चात आगम निष्णात मुनि-आचार्यों द्वारा प्रतिष्ठाचार्य दीक्षा के संस्कारों से संस्कारित प्रतिष्ठाचार्यों को तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य प्रतिष्ठा विधि में पंथवाद अथवा संघवाद के कारण होने वाली मनमानी या क्रियाओं में अनावश्यक परिवर्तन को रोकना तथा आगम सम्मत प्रतिष्ठा विधि को प्रमाणिक स्वरूप प्रदान करना है। उनका कहना है कि प्राचीन ग्रंथों के शोध के माध्यम से जैन धर्म की अमूल्य ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जा सकेगा।
कार्यशाला के अध्यक्ष अष्टापद तीर्थ प्रणेता पं. बाल ब्रह्मचारी धर्मचंद जी शास्त्री दिल्ली, कुलपति पं. महेंद्र कुमार जी व्याकरणाचार्य एवं प्राचार्य मुरैना, संयोजक प्रज्ञापथगामी बाल ब्रह्मचारी अरुण भैया सुधांश तथा मुख्य सूत्रधार मंच मार्तंड बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया पुण्यांश बताए गए हैं। प्रतिष्ठाचार्य के रूप में अखिलेश जी शास्त्री सुप्रज्ञ रामगढ़ा तथा सिंघई आयुष मोतीबाला जबलपुर का सहयोग रहेगा।
आयोजन के प्रथम सत्र का शुभारंभ करीब 200 विद्वानों के स्वागत एवं सम्मान के साथ होगा। कार्यशाला के लिए देशभर से श्रावक श्रेष्ठियों एवं विद्वानों द्वारा आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। इनमें डॉ. अखिलेश जैन एवं श्रीमती ग्रिष्मा परिवार इंदौर, भूपेंद्र कुमार एवं श्रीमती रितु भिवाड़ी राजस्थान, क्रांति प्रसाद एवं श्रीमती प्रभा छावड़ा डीमापुर, सुमेर एवं विमला छावड़ा किशनगढ़, लबेइन गोधा जयपुर, संजीव जैन एवं मनीषा लखनऊ, श्रीमती सावित्री एवं मुकेश सिंघई, मीना सिंघई दमोह, कमल कुमार एवं नरेश कुमार चंदवाड़ रामगंज मंडी, त्रिलोक चंद्र एवं भूपेंद्र कुमार सांवला रामगंज मंडी, सुखानंद जैन एवं ऋषभ जैन सुंदर विहार दिल्ली, अंकित ट्रेडर्स साढ़ूमर तथा अरविंद जैन गोना मड़ावरा सहित अनेक श्रावक श्रेष्ठियों के नाम शामिल हैं।
भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय मंत्री पवन कुमार जी गोधा दिल्ली एवं आदिनाथ चैनल के डायरेक्टर द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। वहीं श्री दिगंबर जैन ग्लोबल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमनालाल हपावत मुंबई द्वारा विशेष आर्थिक सहयोग प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई है।
आयोजकों के अनुसार कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रांतों से ख्यातिप्राप्त विद्वानों एवं प्रतिष्ठाचार्यों के शामिल होने की सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं। आयोजन समिति द्वारा देशभर से आने वाले अतिथियों एवं विद्वानों के लिए आवास, भोजन, वाहन, सुरक्षा सहित अन्य व्यवस्थाओं के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
आयोजकों ने समाजजनों से इस ऐतिहासिक ज्ञान यज्ञ का साक्षी बनने तथा जैन धर्म की प्राचीन एवं अमूल्य ज्ञान परंपरा को युगों तक सुरक्षित रखने के इस प्रयास में सहभागी बनने का आह्वान किया है।
मीडिया प्रभारी: भरत सेठ घुवारा


