
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से आयोजित ‘मल्हार’ उत्सव की दूसरी संध्या शास्त्रीय संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से सजी रही। सितार के सुरों में जहां राग गौड़ मल्हार ने सावन की फुहार का एहसास कराया, वहीं मोहिनीअट्टम की भावपूर्ण प्रस्तुति में राम, सीता, कृष्ण और शिव की कथाएं जीवंत हो उठीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सितार वादक विनायक चित्तर ने राग गौड़ मल्हार से सांगीतिक संध्या का आगाज किया। उनके आलाप में राग की गंभीरता और वर्षा की कोमल अनुभूति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। जोड़ और झाला में उनकी प्रभावी तानों ने वातावरण को सुरों की फुहार से भर दिया।
विलंबित एवं मध्यलय की बंदिशों में विनायक चित्तर ने गौड़ मल्हार की गंभीरता के साथ उसकी चंचलता को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। तबले पर पं. पार्थसारथी मुखर्जी की सधी हुई संगत ने प्रस्तुति को लयात्मक मजबूती प्रदान की। दोनों कलाकारों के बीच सुर और ताल का सुंदर संवाद श्रोताओं को विशेष रूप से आकर्षित करता रहा।
इसके बाद मोहिनीअट्टम नृत्यांगना पल्लवी कृष्णन ने मंच पर भाव, भक्ति और भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को साकार किया। गोस्वामी तुलसीदास की रचना ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन’ से शुरू हुई प्रस्तुति में भगवान राम के शौर्य, मर्यादा और करुणा को नृत्य भावों के माध्यम से जीवंत किया गया।
‘चिंताविष्टायाया सीता’ में सीता के अकेलेपन, पीड़ा, आत्मसम्मान और आत्मबल की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। धरती में समा जाने के प्रसंग ने प्रस्तुति को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की।
इसके बाद ‘माया मोहन कृष्ण’ में द्रौपदी की पुकार, गजेंद्र की रक्षा और कुरुक्षेत्र में अर्जुन के विषाद को दूर करते श्रीकृष्ण के प्रसंगों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। समापन ‘शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्’ से हुआ, जिसमें ‘नमः शिवाय’ की अनुगूंज से पूरा सभागार आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर हो गया।
इस अवसर पर केंद्र निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी के साथ उप निदेशक पवन अमरावत, सहायक निदेशक दुर्गेश चांदवानी, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, कार्यक्रम अधिशासी हेमंत मेहता सहित शहर के अनेक संगीतप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृतिकर्मी दीपक पंवार ने किया। ‘मल्हार’ की यह संध्या श्रोताओं के मन में लंबे समय तक सुरों, भावों और भारतीय संस्कृति की सुंदर स्मृतियां छोड़ गई।
रिपोर्ट/फोटो: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


