
विशेष आलेख | शाबाश इंडिया।
डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’
आज के समय में मानसिक तनाव और चिंता की समस्या तेजी से सामने आ रही है। एंग्जायटी न्यूरोसिस (Anxiety Neurosis) को अब मुख्य रूप से एंग्जायटी डिसऑर्डर यानी चिंता विकारों के अंतर्गत समझा जाता है। इसमें व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के या परिस्थिति से अधिक चिंता, भय और बेचैनी महसूस हो सकती है। मन में बार-बार नकारात्मक विचार और किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
एंग्जायटी न्यूरोसिस क्या है?
यह ऐसी मानसिक और शारीरिक अवस्था है, जिसमें व्यक्ति अत्यधिक चिंता, आशंका और तनाव महसूस करता है। इसका असर केवल मन पर ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी दिखाई दे सकता है। यह कमजोरी या पागलपन नहीं है। सही समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रमुख लक्षण
मानसिक लक्षण
- लगातार चिंता या किसी अनहोनी का डर बने रहना।
- बेचैनी और घबराहट महसूस होना।
- किसी काम में ध्यान लगाने में कठिनाई।
- चिड़चिड़ापन और मन का अशांत रहना।
- नींद में परेशानी होना और गहरी नींद न आना।
शारीरिक लक्षण
- दिल की धड़कन तेज होना।
- हाथ-पैर काँपना या अधिक पसीना आना।
- साँस तेज चलना या घुटन जैसा महसूस होना।
- चक्कर आना अथवा सिर हल्का या भारी महसूस होना।
- पेट में परेशानी और मितली होना।
- मांसपेशियों में तनाव बने रहना।
चिंता विकार के संभावित कारण
- लंबे समय तक मानसिक तनाव रहना।
- परिवार में चिंता संबंधी समस्याओं का इतिहास होना।
- परीक्षा, नौकरी, पारिवारिक या सामाजिक दबाव।
- पर्याप्त नींद न लेना।
- चाय, कॉफी या अन्य कैफीनयुक्त पदार्थों का अधिक सेवन।
- कुछ दवाओं या नशीले पदार्थों का प्रभाव।
- थायरॉयड जैसी कुछ शारीरिक समस्याएँ भी चिंता जैसे लक्षण पैदा कर सकती हैं।
चिंता विकार के प्रमुख प्रकार
चिंता से जुड़े विकार अलग-अलग रूपों में दिखाई दे सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं—
- सामान्यीकृत चिंता विकार: छोटी-बड़ी बातों को लेकर लगातार और अत्यधिक चिंता करना।
- पैनिक डिसऑर्डर: अचानक बहुत तेज घबराहट या डर का दौरा पड़ना।
- सामाजिक चिंता विकार: लोगों के सामने बोलने या सामाजिक परिस्थितियों में अत्यधिक डर महसूस करना।
- विशिष्ट फोबिया: किसी खास वस्तु, जीव या परिस्थिति से असामान्य डर लगना।
- पृथक्करण चिंता विकार: किसी प्रिय व्यक्ति से अलग होने पर अत्यधिक चिंता होना।
- पदार्थ या दवा से उत्पन्न चिंता: कुछ दवाओं, नशीले पदार्थों या शारीरिक समस्याओं के कारण चिंता जैसे लक्षण होना।
इसकी जाँच कैसे होती है?
एंग्जायटी की पहचान के लिए कोई एक निश्चित रक्त जाँच नहीं होती। चिकित्सक सामान्यतः—
- मरीज के लक्षणों और उनकी अवधि के बारे में जानकारी लेते हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नावली का उपयोग कर सकते हैं।
- आवश्यकता के अनुसार शारीरिक परीक्षण करते हैं।
- थायरॉयड, खून की कमी, रक्त शर्करा आदि की जाँच कर अन्य संभावित कारणों का पता लगा सकते हैं।
सावधानी और बचाव
कुछ अच्छी आदतें चिंता को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं—
- प्रतिदिन पर्याप्त नींद लें।
- नियमित रूप से हल्का व्यायाम और योग करें।
- चाय-कॉफी और कैफीन का सेवन सीमित रखें।
- समय पर भोजन करें और लंबे समय तक भूखे न रहें।
- मोबाइल और तनावपूर्ण गतिविधियों से बीच-बीच में विराम लें।
- गहरी साँस लेने और धीरे-धीरे छोड़ने का अभ्यास करें।
- बार-बार चिंता या घबराहट होने पर परिवार के विश्वसनीय व्यक्ति, चिकित्सक या मनोचिकित्सक से सलाह लें।
होम्योपैथिक उपचार
होम्योपैथी में एंग्जायटी के लिए एकोनाइट, अर्जेन्टम नाइट्रिकम, जेल्सीमियम, आर्सेनिक एल्बम, इग्नेशिया और काली फॉस जैसी औषधियों का उल्लेख किया जाता है। होम्योपैथिक पद्धति में दवा का चयन व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
हालाँकि, चिंता विकारों के उपचार में होम्योपैथी की प्रभावशीलता के पर्याप्त और विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए केवल होम्योपैथिक दवाओं पर निर्भर रहकर प्रमाणित उपचार को टालना उचित नहीं है। मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, विशेषकर कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT), और आवश्यकता पड़ने पर मनोचिकित्सक द्वारा दी गई दवाएँ प्रभावी उपचार विकल्प हैं।
महत्वपूर्ण सावधानी: यदि सीने में तेज दर्द, बेहोशी, साँस लेने में बहुत अधिक कठिनाई या अचानक अत्यधिक घबराहट हो, तो इसे केवल एंग्जायटी मानकर नजरअंदाज न करें। तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।
डॉ. एम.एल. जैन ‘मणि’
एम.ए., बी.एच.एम.एस. (होम्योपैथिक), पीएच.डी.
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ होम्योपैथ एवं पूर्व शैक्षणिक सदस्य, होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, जयपुर।
मोबाइल: 8949032693


