
जयपुर | शाबाश इंडिया।
राजस्थान जैन साहित्य परिषद, जयपुर की मासिक विचार गोष्ठी गुरुवार, 29 अक्टूबर को श्री दिगम्बर जैन मंदिर, मोहनबाड़ी में आयोजित की गई। गोष्ठी का विषय ‘अनेकान्तवाद और उसके अनुयायी : सिद्धान्त, व्यवहार और विरोधाभास’ रहा। युवा विद्वान पं. प्रद्युम्न कुमार जैन शास्त्री ने मुख्य वक्ता के रूप में विषय के विभिन्न पहलुओं पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने अनेकान्तवाद को जैन धर्म का आधार, प्राण और दार्शनिक स्तर का गंभीर सिद्धान्त बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुश्री दीप्ति जैन द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद सेठ छिदामी लाल जैन मंदिर, फिरोजाबाद के ट्रस्टी श्रेष्ठी श्री राजीव पांड्या ने दीप प्रज्वलित किया तथा श्रेष्ठी कपूर चंद जी कसेरा मोहनबाड़ी परिवार द्वारा जिनवाणी विराजित की गई।
राजस्थान जैन साहित्य परिषद के अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने विषय की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनेकान्तवाद जैन दर्शन का ऐसा महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है, जो विचारों में उदारता, दृष्टिकोण में व्यापकता और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र बिलाला ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया।
मुख्य वक्ता पं. प्रद्युम्न कुमार जैन शास्त्री ने जैन आचार्यों के ग्रंथों का उद्धरण देते हुए सिद्धान्त और व्यवहार के बीच सामंजस्य की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अनेकान्तवादी दृष्टिकोण के माध्यम से ‘ऐसा ही है’ और ‘ऐसा भी है’ जैसी विभिन्न विचारधाराओं को समझने तथा संवाद की स्वस्थ परंपरा विकसित करने की महत्ता बताई। साथ ही आत्मनिरीक्षण के लिए उपस्थितजनों के समक्ष कुछ विचारोत्तेजक प्रश्न भी रखे।
परिषद के मंत्री श्री महावीर कुमार चान्दवाड़ ने परिषद की स्थापना, उद्देश्यों और अब तक की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। गोष्ठी का विशेष आकर्षण ‘अभिनव प्रयोग’ रहा, जिसमें श्रोताओं की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। इस दौरान डॉ. माधुरी जैन, राजकुमार बिल्टीवाला, महेंद्र सौगानी (चितावा), जे.के. जैन (जनकपुरी) सहित अनेक प्रबुद्धजनों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में राजस्थान जैन साहित्य परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ स्थानीय जैन समाज के गणमान्यजनों, धर्मानुरागियों और साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। परिषद के कोषाध्यक्ष प्रद्युम्न पाटनी ने बताया कि इस अवसर पर अनेक स्थानीय श्रोताओं ने परिषद की आजीवन सदस्यता भी ग्रहण की।
गोष्ठी का कुशल संचालन परिषद के संयुक्त मंत्री रमेश गंगवाल ने किया। अंत में परिषद के संयोजक श्री सुदर्शन पाटनी ने सभी अतिथियों, मुख्य वक्ता, सहयोगियों और दूर-दूर से आए सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के समापन पर वात्सल्य भोज का आयोजन हुआ, जिसमें सभी ने आत्मीयता और सौहार्द के साथ सहभागिता की। मंदिर समिति के मंत्री नरेंद्र जैन, जैन पत्रकार महासंघ के मंत्री उदय भान बडजात्या तथा जैन बैंकर्स फोरम के मंत्री सुनील काला ने कहा कि परिषद की यह पहल साहित्यिक एवं दार्शनिक चेतना के विकास के साथ समाज में स्वस्थ संवाद, सहिष्णुता और वैचारिक उदारता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण साबित हुई।


