
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
कनाडाई कलाकार सुज़ी बिरस्टीन के साथ विशेष संवाद ‘मीट द आर्टिस्ट’, चार दशक के सृजनात्मक अनुभवों से मिली प्रेरणा
मिट्टी जब कलाकार की उंगलियों का स्पर्श पाती है तो वह केवल शिल्प नहीं रहती, बल्कि संवेदनाओं को आकार देने लगती है। इसी तरह कैनवास पर बिखरे रंग कल्पनाओं से मिलकर अनकही कहानियां बयां करते हैं। कला की इस अनूठी दुनिया के विविध पहलुओं से गुरुवार को मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के दृश्यकला विभाग के विद्यार्थी रूबरू हुए। अवसर था कनाडा की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार सुज़ी बिरस्टीन के साथ आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम ‘मीट द आर्टिस्ट’ का।
चार दशक से अधिक समय से कला साधना में जुटीं बिरस्टीन ने विद्यार्थियों के साथ अपने सृजनात्मक सफर के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कला किसी एक माध्यम, शैली या भौगोलिक सीमा में बंधी नहीं होती। इसकी वास्तविक शक्ति कलाकार की कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना में निहित होती है।
कैनवास से सेरेमिक तक, अभिव्यक्ति के अनगिनत रंग
बिरस्टीन ने चित्रकला और सेरेमिक शिल्प के बीच सृजनात्मक संबंधों को समझाते हुए बताया कि एक ही विचार अलग-अलग माध्यमों में नए रूप और अर्थ के साथ सामने आ सकता है। अपनी चर्चित कलाकृति श्रृंखला ‘लेडीज नॉट वेटिंग’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसके पीछे छिपे विचारों, प्रेरणाओं और प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी स्वतंत्र रचनात्मक पहचान विकसित करने की सलाह दी। साथ ही कहा कि नई तकनीकों को अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी जरूरी है।
विद्यार्थियों के सवालों से खुली कला की नई दुनिया
कार्यक्रम का सबसे रोचक पहलू विद्यार्थियों की जिज्ञासाएं रहीं। किसी ने अंतरराष्ट्रीय कला जगत में भारतीय कलाकारों की संभावनाओं के बारे में पूछा तो किसी ने कला को करियर के रूप में अपनाने की चुनौतियों पर सवाल किए। नई तकनीकों और बदलते कलात्मक प्रयोगों पर भी सार्थक चर्चा हुई। बिरस्टीन ने अपने अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को मौलिक सोच विकसित करने और निरंतर नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दृश्यकला विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर वशिष्ठ ने कहा कि ऐसे संवाद विद्यार्थियों को वैश्विक कला परिदृश्य से जोड़ने के साथ उनकी रचनात्मक सोच को भी व्यापक बनाते हैं।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शाहिद परवेज ने अतिथि कलाकार का परिचय दिया, जबकि सह-समन्वयक डॉ. दीपिका माली ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. यामिनी शर्मा, दिविष्ठा राठौड़, रोकेश सिंह, डॉ. मनीष भट्ट, प्रभूलाल, शालिनी सिंह, सोनम फुलवरिया, गिरिराज सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


