Tuesday, October 6, 2026

आचार्य आदित्य सागरजी के सान्निध्य में श्रीमाल जैन जागृति संस्था का भव्य आयोजन, प्रतिभाओं का सम्मान और क्षमावाणी पर्व बना आकर्षण

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जयपुर | शाबाश इंडिया।

अखिल भारतीय श्रीमाल जैन जागृति संस्था की ओर से आचार्य श्री 108 आदित्य सागरजी महाराज के पावन सान्निध्य में भक्तामर दीप अर्चना, क्षमावाणी पर्व एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन मुरलीधर राणा जी की नसिया, चूलगिरी में हुआ। धर्म, संस्कृति, क्षमा और प्रतिभा सम्मान के अनूठे संगम ने आयोजन को भक्तिमय एवं आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य कैलाशजी, हरसीजी, नेहरूजी, बुद्धि प्रकाशजी एवं महेंद्रजी को प्राप्त हुआ। इसके बाद संत कुमारजी एवं शाम्य कुमारजी जैन ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया, जबकि हरिमोहनजी, शिखरजी, चमत्कारजी एवं विमलजी जैन ने शास्त्र भेंट किए।

कार्यक्रम संयोजक नवल जैन ने बताया कि भक्तामर कलश की स्थापना अजय कुमार जैन, अभिषेक जैन एवं विवेक जैन डाबर वाले परिवार की ओर से की गई। इसके बाद आचार्य श्री ने विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। ऋद्धि एवं शांति मंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच 48 परिवारों ने भक्ति-दीप प्रज्वलित कर भगवान के चरणों में श्रद्धा, भक्ति एवं मंगलकामनाएं अर्पित कीं। भक्तामर स्तोत्र के पाठ से पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया।

क्षमावाणी पर्व के अवसर पर आचार्य श्री 108 आदित्य सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन में क्षमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाजबंधुओं को मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगने तथा सभी के प्रति मैत्री भाव रखने की प्रेरणा दी। आचार्य श्री के संदेश से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और अनेक समाजबंधुओं ने परस्पर ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहकर क्षमा याचना की।

इसके बाद श्रीमती गीता देवी, गोकलेन्द्रजी जैन एवं वीरेंद्रजी जैन परिवार की ओर से भव्य महाआरती की गई। साक्षी जैन ने सुमधुर भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भजन का आनंद लिया।

समारोह का विशेष आकर्षण समाज की प्रतिभाओं का सम्मान रहा। वरिष्ठजनों, त्यागी-व्रतीजनों तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। दशलक्षण महापर्व के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाली प्रतिभाओं को भी सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार एवं सम्मान राजमलजी, चांदमलजी, आशीषजी एवं दीपकजी जैन जाखोदा वालों की ओर से दिए गए। सम्मान पाकर प्रतिभाओं के चेहरों पर उत्साह और अभिभावकों के चेहरे पर गर्व की झलक दिखाई दी।

आयोजन की सफलता में संस्था की मुख्य कार्यकारिणी, महिला मंडल एवं युवा मंडल के सदस्यों ने सक्रिय योगदान दिया। संस्था के परम संरक्षक ज्ञानेंद्रजी एवं संरक्षक जिनेन्द्र कुमार जैन ने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पित सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

संस्था के सचिव डॉ. इंद्र कुमार जैन ने बताया कि संस्था का उद्देश्य धार्मिक संस्कारों के साथ समाज की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं धर्म से जोड़ना है। ऐसे आयोजन समाज में एकता, संस्कार, सेवा, प्रतिभा प्रोत्साहन और धार्मिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

अंत में संस्था अध्यक्ष अजय कुमार जैन ने आचार्य श्री के पावन सान्निध्य, अतिथियों, समाजबंधुओं, दानदाताओं एवं आयोजन को सफल बनाने वाले सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। पूरे आयोजन में भक्ति, क्षमा, प्रतिभा सम्मान और सामाजिक एकजुटता का सुंदर संगम देखने को मिला।

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