
उदयपुर | शाबाश इंडिया।
हाथ में मोबाइल कैमरा, सामने मेवाड़ के शौर्य और स्वाभिमान से जुड़ा परिवेश और मन में कुछ अलग देखने की ललक—इसी रचनात्मक नजर ने VIFT कॉलेज की छात्रा रिमझिम शर्मा को प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में आयोजित ‘दिवेर विजय महोत्सव’ की मोबाइल फोटोग्राफी प्रतियोगिता में तृतीय स्थान दिलाया।
दस दिवसीय महोत्सव में इतिहास केवल भाषणों और स्मृतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं ने कैमरे, मोबाइल, पोस्टर, रील, रंग और शब्दों के माध्यम से अपनी रचनात्मक दृष्टि से इतिहास और विरासत को अभिव्यक्त किया। मोबाइल फोटोग्राफी श्रेणी में दिव्यांगना राणावत ने प्रथम, योवन्तराज माहेश्वरी ने द्वितीय और रिमझिम शर्मा ने तृतीय स्थान हासिल किया। लक्षित लोहार, अजय नागदा और विशाल सिंह शक्तावत को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।
रिमझिम की उपलब्धि इसलिए भी खास रही कि आज मोबाइल फोटोग्राफी युवाओं के लिए केवल तस्वीर खींचने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी दृष्टि, संवेदना और कहानी कहने का सशक्त जरिया बन चुकी है। उनकी सफलता ने यह संदेश भी दिया कि प्रभावशाली तस्वीर के लिए महंगे कैमरे से ज्यादा जरूरी देखने का नजरिया और रचनात्मक सोच है।
अपनी उपलब्धि पर रिमझिम ने बताया कि कॉलेज में पत्रकारिता के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रैक्टिकल सेशंस के माध्यम से इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कम समय में अपनी प्रतिभा को निखारकर सफलता की ओर बढ़ सकें।
समापन समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हल्दीघाटी और दिवेर की गौरवगाथा से नई पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत बताई। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने महाराणा प्रताप को स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया।
महोत्सव के दौरान भाषण, निबंध, रील मेकिंग, पोस्टर, चित्रकला और फोटोग्राफी सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं ने युवा प्रतिभाओं को अपनी रचनात्मकता दिखाने का मंच दिया। रिमझिम का यह पुरस्कार केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उस युवा दृष्टि का सम्मान है, जो मोबाइल की छोटी-सी स्क्रीन में भी इतिहास, संस्कृति और विरासत का बड़ा कैनवास देख लेती है।
रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’


