
इंदौर | शाबाश इंडिया।
राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के 44वें दीक्षा दिवस के अवसर पर इंदौर में आयोजित समारोह में अशोकनगर चातुर्मास की स्मारिका का विमोचन कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने किया। श्री दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति इंदौर के तत्वावधान में आयोजित समारोह में उदयपुर के महापौर पारस सिंघवी सहित श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस दौरान गुरुदेव के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
दलाल बाग मैदान में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जिस वस्तु या व्यक्ति के प्रति हमें लगाव होता है, उसके प्रति भी सावधान रहना आवश्यक है। अतिभक्ति खतरनाक हो सकती है और इससे हमेशा बचना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चा भक्त गुरु के आशीर्वाद के भरोसे लापरवाह नहीं होता, बल्कि उस आशीर्वाद को सार्थक करने के लिए स्वयं पूरी सावधानी बरतता है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा डगमगाने से पहले उसे मजबूत कर लेना चाहिए। इच्छा पूरी नहीं होने पर व्यक्ति अपने निकट संबंधियों तक से नाराज हो जाता है और बैर भाव पाल लेता है। इसलिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपनी इच्छाओं और भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए विवेक के साथ आगे बढ़े। कार्यक्रम की शुरुआत इंदौर महिला मंडल द्वारा नृत्य के साथ मंगलाचरण की प्रस्तुति से हुई।
समारोह को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि अशोकनगर चातुर्मास की इतनी भव्य स्मारिका लेकर समाजजन उपस्थित हुए हैं, इससे ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वहां चातुर्मास कितना प्रभावशाली रहा होगा। उन्होंने कहा कि अशोकनगर पर मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज की विशेष कृपा रही है। श्रावक संस्कार शिविरों के माध्यम से उन्होंने जैन समाज के साथ अन्य समाजों को भी संस्कार और जीवन मूल्यों का संदेश दिया है। उन्होंने गौशाला, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि संस्कार और संस्कृति को संत ही सुरक्षित रख सकते हैं। त्याग, तपस्या और कठिन चर्या के साथ राष्ट्र निर्माण की सोच समाज को दिशा देने का कार्य करती है। इस अवसर पर कमेटी अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक रानी दोशी, स्वागत अध्यक्ष संजय सामरिया, धर्मेंद्र समकेम, महामंत्री हर्ष जैन, कोषाध्यक्ष आकाश कोयला, मंत्री अक्षय कासलीवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने राज्यपाल का पीत वस्त्र, तिलक, शॉल और श्रीफल से सम्मान किया।
अशोकनगर चातुर्मास की स्मारिका का विमोचन राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत के साथ चक्रवर्ती मनीष गोधा, चक्रवर्ती नवीन आनंद गोधा, अध्यक्ष राकेश कासल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, राजेंद्र अमन, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, शालू, गौरव, भारत और संजीव श्रागर सहित अन्य प्रमुखजनों ने भक्तों की जय-जयकार के बीच किया।
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के 44 वर्ष से अधिक के संयमित जीवन में सैकड़ों तीर्थ क्षेत्रों के जीर्णोद्धार और नव निर्माण का कार्य उनके आशीर्वाद से आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि तीर्थों के जीर्णोद्धार के प्रति समाज को जागृत करने में मुनि पुंगव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस दौरान अशोक पाटनी की धर्मपत्नी श्रीमती सुशीला पाटनी ने गुरु कृपा का उल्लेख करते हुए इस वर्ष का चातुर्मास राजस्थान में होने की इच्छा व्यक्त की, ताकि ज्ञानोदय तीर्थ नारेली, अजमेर में पंचकल्याणक महामहोत्सव आयोजित किया जा सके। शांता पाटनी ने दीक्षा दिवस पर नवधा भक्ति का अवसर मिलने को गौरव का विषय बताया।
जिज्ञासा समाधान के दौरान अशोकनगर जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज की कृपा और आशीर्वाद से अशोकनगर की धार्मिक पहचान और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज अशोकनगर को ‘त्रिकाल चौबीस’ के नाम से जाना जाता है, जिसमें मुनि पुंगव का महत्वपूर्ण योगदान है। देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का दीक्षा दिवस समारोह में पहुंचना गुरु भक्ति का प्रमाण है।
प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया ने कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने भारतीय जैन समाज को निरंतर मार्गदर्शन दिया है। उनके आशीर्वाद से अनेक मंदिरों और तीर्थ क्षेत्रों के जीर्णोद्धार के कार्य आगे बढ़ रहे हैं। समारोह ने दीक्षा दिवस को श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सहभागिता के साथ यादगार बना दिया।


