
अशोकनगर | शाबाश इंडिया।
सुप्रसिद्ध जैन संत मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज का 44वां दीक्षा दिवस समारोह गुरु कृपा एवं उपकार दिवस के रूप में भव्यता के साथ मनाया गया। श्री दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति इंदौर के तत्वावधान में आयोजित समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत मुख्य अतिथि रहे, जबकि उदयपुर के नवनिर्वाचित महापौर पारस सिंघवी की आतिथ्य उपस्थिति रही। सुधामय सभागार में विभिन्न महिला मंडलों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। देशभर से बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने भक्ति भाव के साथ महापूजा में हिस्सा लिया।
समारोह में राजस्थान से करीब 25 वर्षों से गुरुदेव के प्रति समर्पित भक्तों का दल भी पहुंचा, जिन्हें मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने देशभर में गौशाला, शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कार शिविरों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनकी त्याग-तपस्या, कठिन चर्या और राष्ट्र निर्माण की सोच प्रेरणादायी है।
समारोह के दौरान समिति अध्यक्ष नवीन आनंद गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक रानी दोशी, स्वागत अध्यक्ष संजय सामरिया, धर्मेंद्र समकेम, महामंत्री हर्ष जैन, कोषाध्यक्ष आकाश कोयला, मंत्री अक्षय कासलीवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत का पीत वस्त्र, तिलक, शाल एवं श्रीफल से सम्मान किया।
इससे पूर्व दलाल बाग मैदान में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने कहा कि संसार में क्या अच्छा है और क्या बुरा, इसका निर्णय स्वयं व्यक्ति को करना है। हेय और उपादेय का निर्णय अपनी आत्मा को साक्षी मानकर करना चाहिए। जो गलत है, उसे छोड़ देना ही सही निर्णय है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का स्वयं एजेंडा बनाना चाहिए और उसमें अपने कुल, परिवार, समाज तथा देश के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
मुनि श्री ने कहा कि कर्मों के कारण किसी व्यक्ति का जीवन परिस्थितियों के दलदल में फंस सकता है, लेकिन जिन्हें श्रेष्ठ कुल, योग्यता और अनुकूल अवसर मिले हैं, उनके लिए आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना आवश्यक है। व्यक्ति को वैराग्य के पथ से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रेष्ठ नागरिक बनकर अपने घर, समाज और देश के लिए कुछ करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
आहारचर्या के बाद धर्मसभा में मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के त्याग और तपस्या के 44 वर्ष से अधिक समय बीत चुके हैं। इस दौरान उनके आशीर्वाद से सैकड़ों तीर्थ क्षेत्रों के जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण के कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर से श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में पहुंचना गुरु भक्ति का प्रमाण है।
क्षुल्लक श्री गंभीर सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के कार्यों को लेकर कहते थे कि मैंने तो मुनि भेजा था, यह जादू कहां से कर दिया। उन्होंने सांगानेर और चांदखेड़ी सहित विभिन्न स्थानों पर प्राचीन जिन प्रतिमाओं के प्राकट्य और उनके दर्शन का अवसर मिलने का उल्लेख किया।
प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया ने कहा कि मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने भारतीय जैन समाज को बहुत कुछ दिया है और उनका यह योगदान निरंतर जारी है। उनके आशीर्वाद से अनेक मंदिरों के जीर्णोद्धार के कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीक्षा दिवस समारोह को सभी के लिए यादगार बनाया जा रहा है।
समारोह में मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के अशोकनगर में हुए ऐतिहासिक चातुर्मास की स्मारिका का भी विमोचन किया गया। राज्यपाल थावरचंद गहलोत, चक्रवर्ती मनीष गोधा, चक्रवर्ती नवीन आनंद गोधा, अध्यक्ष राकेश कासल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, राजेंद्र अमन, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, शालू, गौरव भारत, संजीव श्रागर सहित अन्य प्रमुख जनों की उपस्थिति में जय-जयकार के बीच स्मारिका का विमोचन हुआ।
इसके साथ ही मुनि श्री के चित्र का अनावरण तथा 44वें दीक्षा दिवस विशेषांक का भी विमोचन किया गया। आयोजन में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और महापूजा के माध्यम से दीक्षा दिवस को उत्सव के रूप में मनाया। महिला मंडलों की प्रस्तुतियों ने समारोह में विशेष आकर्षण जोड़ा और पूरे परिसर में गुरु भक्ति का वातावरण बना रहा।


