Friday, September 25, 2026

दशलक्षण पर्व के अंतिम दिन भक्ति में डूबा जनकपुरी, चौबीसी विधान और भक्तामर अर्चना के साथ हुआ समापन

जयपुर | शाबाश इंडिया।

जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को आचार्य श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में दिनभर पूजा-विधान, भक्ति और आराधना के विभिन्न कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ संपन्न हुए। प्रातः शांतिधारा व पूजन, वासुपूज्य भगवान का निर्वाण कल्याणक, दोपहर में चौबीसी विधान तथा शाम को वार्षिक प्रतिक्रमण एवं भक्तामर अर्चना का आयोजन हुआ।

वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक पदम जैन बिलाला ने बताया कि प्रातः अभिषेक एवं विशेष शांतिधारा का आयोजन किया गया। इसका सौभाग्य विद्या विकास निकीता साखुनियां, तरुण पंकज अजमेरा एवं महावीर कांता पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ। प्रथम अभिषेक अतुल पाटनी ने किया। अन्य वेदियों पर देवेन्द्र मीना कासलीवाल, मनीष शीला सेठी एवं अशोक अंजू बाकलीवाल परिवार को अभिषेक का सौभाग्य मिला। इसके बाद उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजन एवं विधान की समापन प्रक्रिया विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुई। मंडल का मुख्य कलश प्राप्त करने का सौभाग्य मंजू पाटनी परिवार को मिला।

वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विशेष पूजन एवं निर्वाण कांड का वाचन किया गया। निर्वाण लाडू सुनीता भोंच परिवार की ओर से समर्पित किया गया। आचार्य श्री ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की महत्ता बताते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए।

मंदिर समिति के अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश छाबड़ा ने बताया कि दोपहर में चौबीस भगवान की पूजन एवं मंडल विधान का आयोजन हुआ। इसमें भगवान आदिनाथ से भगवान महावीर तक सभी 24 तीर्थंकर भगवान की आराधना की गई।

शाम को श्रीजी की प्रतिमा को करतल ध्वनि के साथ पांडाल में ले जाकर पांडुशिला पर अनंत चतुर्दशी के कलशाभिषेक के लिए विधि-विधानपूर्वक विराजमान किया गया। समाज के जनसमूह की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक किया। अभिषेक के बाद परंपरागत रूप से श्रीजी को माल पहनाने का सौभाग्य समाज के सौभाग्यशाली परिवारों को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में प्रबंध समिति, महिला मंडल एवं युवा मंच का पूर्ण सहयोग रहा।

मंदिर समिति के मंत्री देवेंद्र कासलीवाल ने बताया कि पूजन एवं विधान सहित सभी धार्मिक क्रियाएं श्रमण संस्कृति संस्थान की विदुषी आशिका जैन एवं अनुषी जैन ने विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराईं। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर विशेष वार्षिक प्रतिक्रमण आचार्य श्री द्वारा कराया गया। इसके पश्चात चौदस के अवसर पर मंदिर में नियमित रूप से होने वाले भक्तामर पाठ की दीप अर्चना भी श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ की गई।

दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन आयोजित सभी धार्मिक कार्यक्रमों में समाज के श्रद्धालुओं ने उत्साह और भक्ति भाव के साथ सहभागिता की।

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article

Skip to toolbar