Wednesday, September 23, 2026

मेधावियों के सम्मान और काव्य-स्वरों के बीच हिंदी सप्ताह-2026 का गरिमापूर्ण समापन

उदयपुर | शाबाश इंडिया।

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के संयुक्त आयोजन में हिंदी सप्ताह-2026 का समापन विचार, संस्कृति, रंगमंच और कविता के बहुरंगी संगम के रूप में हुआ। समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, वहीं कवियों की रचनाओं ने भारतीयता और राष्ट्रीय एकता की भावभूमि को जीवंत कर दिया।

‘हिंदी भाषा : भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के संवाहक’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास में संस्कृत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भाषा में परिवर्तन स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन उसकी मौलिकता को बनाए रखना आज बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की समृद्धि उनकी स्थानीय भाषाओं के प्रति आत्मविश्वास से भी जुड़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भाषा का सम्मान करने और वाचिक परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता एवं श्रमजीवी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. मलय पानेरी ने कहा कि भाषाएं कभी वैमनस्य नहीं रखतीं, यह मनुष्यों की प्रवृत्ति होती है। भाषा नदी की तरह बहती है, अपना मार्ग बनाती है और समय के साथ नए तत्वों को आत्मसात करती जाती है। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी और कवियों ने जनमानस को एक सूत्र में बांधने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

अध्यक्षता कर रहे स्नातकोत्तर अध्ययन के अधिष्ठाता प्रो. के.बी. जोशी ने तकनीक के माध्यम से हिंदी के बढ़ते विस्तार को रेखांकित किया। उन्होंने एफएम, रेडियो, दूरदर्शन, इंटरनेट और डिजिटल मंचों को हिंदी की नई संभावनाओं का द्वार बताया। उन्होंने कहा कि स्क्रिप्ट राइटिंग और कंटेंट राइटिंग जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।

विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन नंदवाना ने हिंदी को केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकज्ञान, संत परंपरा और सामूहिक स्मृतियों की संवाहक बताया। उन्होंने शिक्षा, शोध, विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में हिंदी को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। एमए हिंदी के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भाषायी विविधता में एकता का प्रभावशाली संदेश दिया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।

विचार सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने मेवाड़ के ज्ञान-संसार, ‘वीर विनोद’, लिपियों, शिलालेखों और लोक साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. प्रीति भट्ट ने संत साहित्य से आधुनिक हिंदी तक की ज्ञान परंपरा को रेखांकित किया, जबकि डॉ. नीतू परिहार ने अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना और भारतीय संस्कृति के स्वर उद्घाटित किए। दिलीप बेनीवाल एवं पुष्पा पूनिया ने प्रपत्र वाचन किया।

काव्य पाठ में आशा पाण्डेय ओझा, सुनीता निमिष सिंह, सुभाष अग्रवाल, डॉ. निर्मला शर्मा, डॉ. सरस्वती जोशी, दीपिका स्वर्णकार, अर्चना चावला, स्वाति शकुंत, विजय मारु, कुसुम भारद्वाज और डॉ. वीरमाराम पटेल ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन प्रियंका रावल, पूजा डीडल, डॉ. वीरमाराम पटेल और कीर्तिका शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीता त्रिवेदी एवं डॉ. नीतू परिहार ने किया।

रिपोर्ट: राकेश शर्मा ‘राजदीप’

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