Tuesday, September 22, 2026

पार्श्वनाथ जिनालय में श्रद्धा-भक्ति से मनाया उत्तम तप धर्म, रजत कलशों से हुआ जिनेंद्र देव का अभिषेक

ब्यावर | शाबाश इंडिया।

दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन अजमेर रोड स्थित पार्श्वनाथ जिनालय में उत्तम तप धर्म श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम के दौरान भगवान श्री जिनेंद्र देव का रजत कलशों से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर सुख-शांति, समृद्धि और आत्मकल्याण की कामना की। अभिषेक एवं पूजन के दौरान जिनालय परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।

धर्मसभा में उत्तम तप धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और इंद्रियों पर नियंत्रण का साधन है। तप के माध्यम से मनुष्य अपनी इच्छाओं और विकारों पर संयम प्राप्त कर आत्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है। दशलक्षण महापर्व के दौरान श्रद्धालु उपवास, एकासन सहित विभिन्न तप साधनाओं के माध्यम से धर्म आराधना करते हैं।

धार्मिक प्रवचन में बताया गया कि तप के विधान में उपवास के साथ घर एवं व्यापार के कार्यों का त्याग, पांचों इंद्रियों के विषयों से विरक्ति तथा क्रोध आदि कषायों से उत्पन्न कलुषित भावों का त्याग आवश्यक है। उपवास के दिन परिणामों को शांत एवं नियंत्रित रखते हुए सामायिक, स्वाध्याय और अन्य धार्मिक साधनाओं में समय व्यतीत करना चाहिए। सांसारिक कार्यों से दूर रहकर आत्मचिंतन एवं आत्मशुद्धि पर ध्यान देना चाहिए। विषयों और कषायों का त्याग किए बिना केवल भोजन छोड़ना वास्तविक उपवास नहीं, बल्कि लंघन मात्र है।

अध्यक्ष संजय रावका ने कहा कि दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि, संयम और तपस्या का संदेश देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से पर्व के दौरान धार्मिक नियमों का पालन करते हुए जीवन में सदाचार और संयम अपनाने का आह्वान किया।

मंत्री संजय गंगवाल ने बताया कि उत्तम तप धर्म के अवसर पर भगवान श्री जिनेंद्र देव का रजत कलशों से अभिषेक करने का सौभाग्य मंजुलता जी, पवन कुमार, विनोद जी, सुभाष जी, अशोक जी, संजय जी, लोकेश जी एवं नमन जी रांवका परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और एकता का भाव मजबूत होता है।

समाज के अमित गोधा ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन बुधवार को उत्तम त्याग धर्म की पूजा-अर्चना की जाएगी। दस दिवसीय महापर्व में प्रतिदिन एक धर्म की आराधना की जा रही है।

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से धार्मिक आराधना की तथा दशलक्षण महापर्व के शेष दिनों में भी उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लेने का संकल्प लिया।

रिपोर्ट: अमित गोधा, ब्यावर

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