
इंदौर | शाबाश इंडिया।
दलाल बाग मैदान में चल रहे विशाल अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर की धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत, राजकीय अतिथि एवं मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति और तीर्थों की पवित्रता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे देश बदनाम हो। आतंकवाद जैसी गतिविधियां देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने देश के लिए कुछ करने का संकल्प ले।
महाराज श्री ने कहा कि भारत भूमि पवित्रता से परिपूर्ण है, जहां तीर्थंकर भगवंतों ने तपस्या कर इसे पावन बनाया है। आर्यखंड महान पुरुषों की जन्मस्थली रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी आयोजन में वीआईपी के लिए निर्धारित स्थान आकर्षण का केंद्र बन जाता है, उसी प्रकार जम्बूद्वीप का आर्यखंड भी विशेष पवित्र भूमि है। इस पावन भूमि पर जन्म लेने वालों का दायित्व है कि वे अपने आचरण से इसकी पवित्रता को बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र जैसे महापुरुषों ने अपनी तपस्या और आदर्श जीवन से इस भूमि को पवित्र किया है। ऐसे देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इसकी गरिमा और पवित्रता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
मुनि श्री ने कहा कि आज विभिन्न समाजों और सम्प्रदायों के पवित्र तीर्थों की मर्यादा प्रभावित हो रही है। तीर्थ किसी भी समाज या सम्प्रदाय के हों, उनकी पवित्रता बनाए रखना सभी का दायित्व है। उन्होंने समाजजनों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि अवसर मिलने पर तीर्थ क्षेत्रों की पवित्रता और मर्यादा की रक्षा के लिए आवश्यक प्रयास करेंगे।
दोपहर के विशेष सत्र में मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि गुरुदेव के संदेशों को केवल सुनना नहीं, बल्कि जीवन में सूत्रों की तरह उतारना होगा। राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तो देश, धर्म और संस्कृति भी सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रावक संस्कार शिविर में राष्ट्रप्रेम और देश के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों की गाथाओं से राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दी जा रही है। शिविर से प्राप्त संदेशों को अपने-अपने नगरों तक ले जाकर लोगों को प्रेरित करने और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
मुनि सुधासागर जी महाराज ने कहा कि सबसे पहले व्यक्ति को अपने पापों का त्याग करने का प्रयास करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति स्वयं पाप नहीं छोड़ पा रहा है तो उसे दूसरों को प्रेरित करने से पहले अपने आचरण पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कर्म नहीं करना चाहिए, जिसकी बदनामी का भार आने वाली पीढ़ी को उठाना पड़े। संसार में रहते हुए सभी के प्रति मैत्री, प्रमोद, कारुण्य और माध्यस्थ भाव रखना चाहिए।
महाराज श्री ने महापुरुषों की जन्मस्थलियों और पवित्र तीर्थ भूमियों को नशामुक्त रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहां महापुरुषों ने जन्म लिया और विहार किया, ऐसी पवित्र भूमि की गरिमा बनाए रखना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि भारतीय संस्कृति को कलंकित करने वाला कोई कार्य न हो और प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण से देश के गौरव को बढ़ाने का प्रयास करे।


