
जयपुर | शाबाश इंडिया।
दिगम्बर जैन सोशल ग्रुप जयपुर मेन द्वारा सावन उत्सव का आयोजन दिल्ली बाईपास, आमेर के खोर दरवाजे के समीप स्थित ऐतिहासिक दिगम्बर जैन नसियां कीर्ति स्तम्भ परिसर में हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम में ग्रुप के सदस्यों ने धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान विमलनाथ स्वामी एवं कीर्ति स्तम्भ के दर्शन, अर्घ्य समर्पण और जयकारों के साथ भक्ति-आराधना से हुआ। इसके पश्चात आयोजित साधारण सभा में मंत्री हीराचंद बैद ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए गत बैठक की कार्यवाही प्रस्तुत की तथा ग्रुप द्वारा पिछले महीनों में किए गए सेवा कार्यों एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
सभा का शुभारंभ सरला संघी के मंगलाचरण से हुआ। अध्यक्ष धनुकुमार जैन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सदस्यों के जन्मदिन एवं वैवाहिक वर्षगांठ पर माल्यार्पण कर शुभकामनाएं दी गईं। शशि जैन के निर्देशन में सावन विशेष रोचक हाउजी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संगीतज्ञ डॉ. अजित कुमार जैन ने बांसुरी पर “पंख होते तो उड़ आती रे” की मधुर धुन प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। इसके बाद सावन गीत “गौरी म्हारी सावन आयो रे, आज सिजारों तीजां को मैं घेवर लायो रे” की प्रस्तुति पर उपस्थित सदस्य तालियों की गूंज के साथ झूम उठे।
कार्यक्रम में सदस्यों की विशिष्ट उपलब्धियों पर उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर फेडरेशन के निर्मल संघी, दिगम्बर जैन संस्कृत महाविद्यालय के मंत्री महेशचंद चांदवाड, ग्रुप के निदेशक डॉ. विनोद शाह एवं कोषाध्यक्ष विनय कुमार छाबड़ा मंचासीन रहे।
सावन उत्सव के अंतर्गत सदस्यों ने नसियां परिसर में शीशम, आंवला एवं नीम सहित विभिन्न पौधों का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। महिला एवं पुरुष सदस्यों ने नीम के वृक्षों पर पड़े सावन के झूलों का आनंद लिया और स्मृति स्वरूप छायाचित्र भी खिंचवाए।
सायंकालीन भोजन के पश्चात बस संयोजक अनिल जैन के नेतृत्व में सभी सदस्य दिल्ली रोड स्थित अचरोल के आचार्य देशभूषण आश्रम परिसर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर खंडाका पहुंचे, जहां भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन एवं पंचपरमेष्ठी की आरती कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
वापसी यात्रा के दौरान चलती बस में मंत्री हीराचंद बैद ने “तू परम रस पाएगा, पारस भज ले” भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसे सभी सदस्यों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा। पूरे आयोजन ने सदस्यों के बीच धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और पारिवारिक सौहार्द को और अधिक सुदृढ़ किया।


