Wednesday, July 22, 2026

सत्ता पाने को रचते हैं नए-नए षड्यंत्र

सत्ता पाने के लिए, रचें नए षड्यंत्र।
देश-विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥

झूठ-फरेबी के जाल में, उलझा सारा देश।
स्वार्थों की इस आग ने, बदला जन-परिवेश॥
दबती जाती सत्य की, हर दिन निर्मल ध्वनि—
देश-विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥

जाति-धर्म के नाम पर, बाँटें घर-परिवार।
नफ़रत की खेती करें, भूल प्रेम-व्यवहार॥
टूट न जाए एकता, यही समय का मंत्र—
देश-विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥

कुर्सी की खातिर यहाँ, बदल रहे सब पंथ।
जनहित पीछे रह गया, आगे केवल स्वार्थ॥
लोकतंत्र पर हो रहा, छल-कपट का तंत्र—
देश-विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥

जागो भारत के जनो, पहचानो षड्यंत्र।
सत्य, विवेक और साहस से, तोड़ो हर कुतंत्र॥
राष्ट्रभक्ति की ज्योति से, होगा शुभ परिवर्तन—
देश-विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥

‘सौरभ’ जब जन एक हों, विफल सभी षड्यंत्र।
सत्य, प्रेम, सद्भाव से, टूटे हर विष-मंत्र॥
भारत की अखंडता, रहे सदा स्वतंत्र—
सत्ता पाने के लिए, रचें नए षड्यंत्र।
देश-विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥

— डॉ. सत्यवान सौरभ

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