जयपुर | शाबाश इंडिया।
टोंक रोड स्थित भट्टारक जी की नसियां में उपाध्याय श्री ऊर्जयन्त सागर मुनिराज का 33वें वर्षायोग हेतु भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। रविवार शाम दीवानजी की नसियां (हॉस्पिटल रोड) से निकली विशाल शोभायात्रा बैंड की मधुर धुनों, हाथी-घोड़े एवं भव्य लवाजमे के साथ सी-स्कीम और सेंट्रल पार्क होते हुए भट्टारक जी की नसियां पहुँची।
वर्षायोग समिति के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल एवं महामंत्री सुखानन्द जैन के नेतृत्व में सैकड़ों श्रद्धालु शोभायात्रा में शामिल हुए। शोभायात्रा की व्यवस्थाओं का दायित्व मुख्य समन्वयक मनीष बैद तथा संयोजक जितेन्द्र गंगवाल ‘जीतू’, निधि बैराठी एवं धीरज पाटनी ने संभाला।
33वें वर्षायोग के प्रतीक स्वरूप 33 थालियों में प्रबुद्धजनों द्वारा संगीत की मधुर धुनों के बीच उपाध्याय श्री का पाद-प्रक्षालन किया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय श्री ऊर्जयन्त सागर मुनिराज ने कहा कि चातुर्मास साधु-संतों के लिए आत्मचिंतन, आत्मसंयम और साधना का विशेष काल है। इस अवधि में एक स्थान पर स्थिर रहकर आत्मा के निकट बैठना और संयम को सुदृढ़ करना ही चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि अहिंसा, करुणा और शाकाहार के मार्ग पर चलकर ही वैश्विक कल्याण संभव है।
कार्यक्रम का संचालन मुख्य संयोजक रुपेन्द्र छाबड़ा ‘अशोक’ ने किया।
इस अवसर पर भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जी तथा तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125वीं जयंती समारोह समिति के राष्ट्रीय संयोजक जवाहरलाल जैन सहित अनेक गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।


