
जयपुर | शाबाश इंडिया।
जयपुर। महावीर पब्लिक स्कूल, सी-स्कीम में शनिवार को आयोजित अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) के दौरान आयोजित ‘कौशल मेला’ विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता एवं व्यावहारिक शिक्षा का आकर्षण केंद्र रहा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दिशानिर्देशों के अनुरूप आयोजित मेले में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों ने अपने कौशल और नवाचार का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
मेले का उद्घाटन विद्यालय के मानद मंत्री सुनील बख्शी ने किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर विद्यार्थियों के नवाचार, आत्मविश्वास तथा पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष उमराव मल सांघी एवं कोषाध्यक्ष महेश काला भी उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में कला, संस्कृति, विज्ञान, तकनीक, गणित, पाक-कला एवं सतत विकास से जुड़े अनेक आकर्षक स्टॉल लगाए गए। विद्यार्थियों द्वारा तैयार टाई-एंड-डाई, मोटिफ आर्ट, कैनवास पेंटिंग, मंडला आर्ट, मधुबनी आर्ट, पॉट पेंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग, ग्लास पेंटिंग एवं क्रोशिया वर्क ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों की निर्माण प्रक्रिया एवं विशेषताओं की जानकारी भी आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत की।
पाक-कला अनुभाग में विद्यार्थियों द्वारा तैयार अचार, जैम, स्क्वैश एवं मफिन आकर्षण का केंद्र रहे। वहीं किचन गार्डन, जैविक खेती, हाइड्रोपोनिक्स एवं बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट परियोजनाओं ने पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली का संदेश दिया।
तकनीकी अनुभाग में रोबोटिक्स, नेटवर्क टेक्नोलॉजी, रिंग टोपोलॉजी एवं रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के मॉडल विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच और नवाचार क्षमता को दर्शाते नजर आए। गणित अनुभाग में कैलिडोस्कोप, फ्रैक्शन बोर्ड, मल्टीप्लिकेशन मशीन एवं मूविंग क्वाड्रिलेटरल जैसे कार्यशील मॉडलों ने जटिल अवधारणाओं को सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। फोटोग्राफी क्लब की प्रदर्शनी भी विशेष आकर्षण रही।
कार्यक्रम का सबसे मनमोहक आकर्षण मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत संस्कृत कठपुतली नाटक रहा, जिसने मनोरंजन के साथ नैतिक मूल्यों का संदेश भी दिया।
मेले में बड़ी संख्या में पहुंचे अभिभावकों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की। विद्यालय की प्राचार्या सीमा जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की सफलता में कंप्यूटर साइंस, कला, संस्कृत विभाग सहित समस्त शिक्षकों एवं स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कौशल मेले ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव, नवाचार और रचनात्मक सोच के समन्वय से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है।


