इंदौर/शाबाश इंडिया।

✒️ श्रीश ललितपुर की समर्पित लेखनी
कुछ दिन पहले तक इंदौर के श्रद्धालुओं के मन में एक ही प्रश्न था—”इस बार गुरुदेव का चातुर्मास कहां होगा?” जब तक गुरुदेव के पावन चरण उन मार्गों के समीप थे, जहां से अनेक दिशाओं में विहार की संभावनाएं थीं, तब तक प्रतिदिन नई-नई चर्चाएं और संभावनाएं चल रही थीं। कोई एक नगर का नाम ले रहा था, तो कोई दूसरे नगर का। सभी के मन में श्रद्धा, उत्साह और प्रतीक्षा का भाव था।
लेकिन जैसे ही गुरुदेव ने ब्यावरा को पार कर मुख्य मार्ग पर अपने चरण आगे बढ़ाए, मानो तस्वीर स्पष्ट होने लगी। अब यह विश्वास प्रबल हो गया है कि इस मंगल यात्रा का अगला गौरवशाली अध्याय इंदौर की पावन धरा पर लिखा जाएगा।
यह समाचार मिलते ही इंदौर के श्रद्धालुओं में उत्साह और उमंग का संचार हो गया। जिस नगर ने स्वच्छता के क्षेत्र में पूरे देश को बार-बार नई दिशा दी है, जिसने विनम्रता, व्यवहार-कुशलता और जनसहभागिता से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, वही नगर अब एक और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है—गुरुदेव की आगवानी से लेकर चातुर्मास के अंतिम दिवस तक भक्ति, सेवा, अनुशासन और संगठन के प्रत्येक क्षेत्र में एक नया आदर्श प्रस्तुत करने का।
इस चातुर्मास की सबसे बड़ी शक्ति इंदौर का युवा वर्ग होगा। बुजुर्गों का अनुभव और युवाओं का उत्साह जब एक साथ जुड़ता है, तो केवल आयोजन नहीं होते, बल्कि इतिहास का निर्माण होता है।
किसी ने ठीक ही कहा है—
“जिस ओर जवानी चलती है, उसी ओर जमाना चलता है।”
निश्चित रूप से इंदौर का यह चातुर्मास भक्ति, सेवा, अनुशासन और धर्मप्रभावना के क्षेत्र में अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
इंदौर को प्रेम से “छोटा मुंबई” कहा जाता है। अब गुरुदेव के पावन चरण पड़ने के साथ संसार यह भी देखेगा कि यह नगर केवल विकास, व्यापार और स्वच्छता में ही अग्रणी नहीं है, बल्कि श्रद्धा, समर्पण, सामाजिक सेवा और संगठन शक्ति के क्षेत्र में भी बड़े-बड़े महानगरों को प्रेरणा देने की क्षमता रखता है।
यह चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अंकित होने वाला एक प्रेरणादायी अध्याय बनेगा।
और ऐसा हो भी क्यों न…
जिस नगर की ओर जगतपूज्य, राष्ट्रीय संत, निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के पावन चरण बढ़ रहे हों, उस नगर का सौभाग्य स्वयं इतिहास बन जाता है।
इंदौर के समस्त श्रद्धालुओं के जाग्रत पुण्यों की हृदय से अनुमोदना। निश्चय ही यह चातुर्मास केवल इंदौर का नहीं, बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए प्रेरणा, भक्ति और धर्मवैभव का महापर्व सिद्ध होगा।


