
निम्बाहेड़ा। शाबाश इंडिया।
राष्ट्रसंत दिगम्बराचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा कि यदि जीवन को खुशहाल बनाना है तो सबसे पहले स्वयं में परिवर्तन लाना होगा। बुधवार को दिगम्बर जैन समाज द्वारा आयोजित धर्मसभा में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं को बदल लेता है, वही समाज और संसार में परिवर्तन ला सकता है।
आचार्य श्री ने कहा कि आज के समय में घर-घर में कलह और अशांति का कारण व्यक्ति का अपने आचरण से दूर होना है। उन्होंने कहा कि हर कोई यह कहता है कि “जमाना खराब है”, लेकिन इतिहास पर नजर डालें तो कभी भी समय नहीं बदला, केवल इंसान का व्यवहार बदला है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राम युग में भी कैकेयी ने दशरथ की नहीं सुनी और महाभारत काल में दुर्योधन ने भीष्म की बात नहीं मानी। इसलिए समस्या जमाने में नहीं, बल्कि व्यक्ति के दृष्टिकोण में है।
आचार्य श्री ने कहा कि लोग दूसरों को सुधारने में लगे रहते हैं, जबकि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन के तूफान बाहर नहीं, भीतर होते हैं और उनसे निपटने के लिए अपनी सोच और व्यवहार को मजबूत बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जीवन की 80 प्रतिशत समस्याएं केवल वाणी के गलत प्रयोग से उत्पन्न होती हैं, इसलिए व्यक्ति को संयमित, हितकारी और मधुर वचन बोलने चाहिए। यदि सामने वाला न भी समझे तो स्वयं को बदल लेना ही बुद्धिमानी है।
उन्होंने कहा कि जीवन को खुश बनाना है तो अपेक्षाओं को कम कर जो मिला है उसमें संतोष करना सीखना होगा। स्वयं को बदल लेने से पूरी दुनिया बदलती हुई प्रतीत होती है।
इससे पूर्व दिगम्बर जैन समाज द्वारा आचार्य श्री का मंडी चौराहे पर भव्य स्वागत किया गया। समाज अध्यक्ष अशोक गदिया एवं महामंत्री वी.के. जैन के नेतृत्व में संघ का आत्मीय अभिनंदन किया गया।
समाज प्रवक्ता मनोज सोनी ने बताया कि दो दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के तहत गुरुवार को प्रातः कलशाभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात शान्तिनाथ मंदिर प्रांगण में धर्मसभा आयोजित होगी। शाम के सत्र में आनंद यात्रा, गुरुवंदना एवं शंका समाधान कार्यक्रम भी संपन्न होंगे।


