
भीलवाड़ा | शाबाश इंडिया।
अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल के सैकड़ों विद्यार्थियों से विशेष संवाद, बच्चों ने लिया नशामुक्त जीवन जीने का संकल्प
नशे की शुरुआत अक्सर नशे से नहीं, बल्कि गलत संगति से होती है। जो दोस्त गलत काम में साथ दे, वह सच्चा मित्र नहीं होता। सच्चा मित्र वही है, जो गलत कदम उठाने पर हाथ पकड़कर वापस सही रास्ते पर ले आए। बच्चों को नशे से बचाने के लिए केवल समझाइश ही नहीं, बल्कि उनकी संगति और सही निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है। यह प्रेरक विचार श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषिजी ने शांतिभवन में अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल के सैकड़ों विद्यार्थियों के साथ आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए।
युवाचार्यश्री ने कहा कि स्कूल केवल अच्छे अंक प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की तैयारी का केंद्र है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो बच्चों की छिपी प्रतिभा को निखारे, शरीर को मजबूत बनाए, दिमाग को सोचने की शक्ति दे और मन को इतना सक्षम बनाए कि वे कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय ले सकें।
विद्यार्थियों से स्कूल जाने का उद्देश्य पूछते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का काम केवल किताबों के उत्तर याद कराना नहीं, बल्कि बच्चों को अपने सवालों के जवाब स्वयं खोजने योग्य बनाना है। वास्तविक शिक्षा वही है, जो सही-गलत का अंतर समझाए, समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करे और निर्णय लेने का साहस प्रदान करे।
तकनीक मददगार बने, सोचने की ताकत का विकल्प नहीं
तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर युवाचार्यश्री ने कहा कि आज हर सवाल का जवाब कुछ ही क्षणों में मिल जाता है, लेकिन इससे स्वयं सोचने की आदत समाप्त नहीं होनी चाहिए। यदि हर प्रश्न का समाधान मशीन से ही लेना है तो अपने दिमाग की कसरत कब होगी? तकनीक का उपयोग मदद के लिए करें, उसे अपनी सोचने की शक्ति का विकल्प न बनने दें।
रैंक और अंकों के विषय में उन्होंने कहा कि प्रथम स्थान प्राप्त करना अच्छी उपलब्धि है, लेकिन पीछे रह जाने वाला विद्यार्थी असफल नहीं होता। जिसने ईमानदारी से मेहनत की है, वह भी बधाई का अधिकारी है। अंक मेहनत का परिणाम बता सकते हैं, लेकिन वे किसी बच्चे की संपूर्ण योग्यता का मापदंड नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा की असली परीक्षा स्कूल की उत्तरपुस्तिका से बाहर जीवन में होती है। क्या सही है, क्या गलत है और किस परिस्थिति में कौन-सा निर्णय लेना चाहिए, इसकी समझ विकसित करना जरूरी है। यदि पढ़ाई निर्णय लेने की क्षमता नहीं बढ़ाती तो वह केवल जानकारी तक सीमित रह जाती है।
मोबाइल से ज्यादा जरूरी है परिवार के साथ बिताया समय
मोबाइल के बढ़ते प्रभाव पर युवाचार्यश्री ने बच्चों को परिवार के साथ समय बिताने का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के घर लौटने का इंतजार करते हैं, उनकी पसंद का नाश्ता तैयार रखते हैं, लेकिन बच्चा घर आते ही मोबाइल में खो जाए तो धीरे-धीरे यह दूरी रिश्तों में भी दिखाई देने लगती है। मोबाइल हर समय उपलब्ध रहेगा, लेकिन माता-पिता के साथ बिताया समय दोबारा लौटकर नहीं आएगा।
उन्होंने कहा कि बचपन और किशोरावस्था अच्छी आदतें विकसित करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है। खेल, अनुशासन, पढ़ने की आदत, परिवार के प्रति संवेदनशीलता और स्वयं सोचने का अभ्यास इसी उम्र में मजबूत किया जाना चाहिए। आज की अच्छी आदतें ही भविष्य में मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं।
सच्चा मित्र गलत रास्ते पर जाने से रोकता है
मित्रता पर विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए युवाचार्यश्री ने पूछा कि सच्चा मित्र कौन होता है? उन्होंने कहा कि मित्र वही है, जो आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे, गलत कदम उठाने से रोके और मुश्किल समय में साथ खड़ा रहे। केवल साथ घूमने या समय बिताने वाला हर व्यक्ति सच्चा मित्र नहीं होता। अच्छा मित्र गलत रास्ते पर साथ नहीं देता, बल्कि वहां से वापस खींचकर सही राह दिखाता है।
युवाचार्यश्री ने कहा कि स्कूल से केवल प्रमाणपत्र लेकर निकलना शिक्षा की सफलता नहीं है। मजबूत शरीर, सोचने वाला दिमाग, सही निर्णय लेने वाला मन, अच्छे मित्र और अच्छे संस्कार लेकर निकलना ही पढ़ाई की वास्तविक उपलब्धि है।
सैकड़ों विद्यार्थियों ने लिया नशामुक्त जीवन का संकल्प
विशेष संवाद के समापन पर युवाचार्यश्री की प्रेरणा से सैकड़ों विद्यार्थियों ने नशामुक्त जीवन जीने, किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने और गलत संगति में नहीं पड़ने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने अपने मित्रों को भी नशे से दूर रखने तथा स्वस्थ और नशामुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करने का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन पंकज सूरिया, सचिव अजय चौरड़िया, प्रिंसिपल प्रतिमा यादव एवं स्कूल प्रबंधक सूरजमल जैन सहित विद्यालय प्रबंधन से जुड़े सदस्यों ने युवाचार्यश्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस प्रेरक संवाद कार्यक्रम के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रवक्ता: सुनील चपलोत
मोबाइल: 9414730514
अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल, भीलवाड़ा


